राखी कब है ? शुभ महूर्त !!
उदया तिथि और शुभ मुहूर्त को देखते हुए 12 अगस्त की सुबह ही बहनें अपने भाई को राखी बांधें तो बेहतर रहेगा। 12 अगस्त, शुक्रवार को धाता और सौभाग्य योग भी बन रहे हैं।ऐसे शुभ योग में मनाया गया भाई -बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व दोनों के जीवन में सुख-समृद्धि और लंबी आयु लाएगा।
कुछ मान्यताएं:
इन्द्र की पत्नी शची ने इन्द्र देव को रक्षासूत्र बांधा:
हिन्दू धर्म शास्त्रों की मानें तो सर्वप्रथम देवराज इन्द्र की पत्नी शची ने वृतटसुर के युद्ध में सबसे पहले इन्द्र देव को रक्षासूत्र बांधा था मान्यता है कि प्राचीन काल में जब भी कोई युद्ध में जाता था तब कलावा या मौली बांधकर पूजा की जाती थी।
राजा बलि ने भगवान वामन को कलावा बांधा:
एक अन्य कथा के अनुसार दान से पहले असुर राजा बलि ने यज्ञ में भगवान वामन को कलावा बांधा था इसके बाद ही वामन देव ने तीन पग भूमि दान कर प्रसन्न होकर उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर अमरत्व का वचन दिया।
माता लक्ष्मी ने राजा बलि के हाथ में बांधा रक्षा सूत्र:
इसके अलावा माता लक्ष्मी ने अपने पति श्री हरि विष्णु की रक्षा हेतु राजा बलि के हाथ में रक्षा सूत्र या कलावा बांधा था इसके बाद वह पति को पाताल लोक से साथ ले गई थी।
द्रौपदी ने श्री कृष्ण के हाथ में बांधा रक्षा सूत्र:
जब श्री कृष्ण ने शिशुपाल का वध किया था तो उनकी बाएं हाथ की अंगुली कट गई और उससे खून आने लगा यह देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़ कर कान्हा की उंगली पर बांध दिया तभी से रक्षाबंधन मनाने की परंपरा चली आ रही है।
राखी बांधते समय लगाएं तीन गांठें:
तीन गांठें लगाना शुभरक्षाबंधन पर जब बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो रक्षा सूत्र पर तीन गांठें लगाएं धार्मिक मान्यता के अनुसार, राखी बांधते समय तीन गांठें लगाना शुभ माना जाता है क्योंकि तीन गांठ का संबंध त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश से है।
राखी की पहली गांठ भाई की लंबी आयु के लिए, दूसरी गांठ स्वयं की लंबी आयु के लिए, तीसरी गांठ भाई बहन के रिश्ते में मिठास लाने और सुरक्षित रखने के लिए बांधी जाती है ऐसे में राखी बांधते समय तीन गांठें लगाना शुभ होता है।
भद्रा काल में रक्षासूत्र नहीं बांधे:
भद्रा काल में राखी बांधना बहुत अशुभ माना जाता है इतना ही नहीं कोई भी शुभ काम कभी भी भद्रा काल में नहीं करना चाहिए ऐसा करने से बनते काम भी बिगड़ जाते हैं मान्यता है कि लंकापति रावण की बहन ने उसे भद्रा काल में राखी बांधी थी और बाद में उसका सर्वनाश हो गया था लिहाजा भद्रा काल में राखी बांधने से बचना चाहिए।बनारस पंचांग के विद्वान इस बात पर सहमत हैं कि भद्रा में किसी तरह का रक्षासूत्र नहीं बांधा जा सकता है। भद्रा रात में समाप्त होगी। रात में रक्षासूत्र बांधने का विधान नहीं है। रक्षासूत्र बांधने के पहले देवता का चढ़ाया जाता है। पूर्णिमा की उदयातिथि 12 अगस्त को पड़ रही है। इसलिए उदयातिथि को मानते हुए सूर्य अस्त होने तक रक्षाबंधन मनाया जा सकता है।
आचार्य पवन तिवारी
संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिष सेवा संस्थान
9621203721
