हरियाणा के सोनीपत नगर निगम चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा पार्षद उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही पार्टी में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। मेयर पद के प्रत्याशी कमल दीवान के पहले चुनाव लड़ने से इनकार और फिर मान जाने के बीच टिकटों में हुए बदलाव ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
शुक्रवार को पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आया। वार्ड-5 से टिकट की दावेदार संतोष कादियान ने पार्टी छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। वहीं, जिला महामंत्री सतबीर निर्माण ने भी चेतावनी दी है कि वह अपने बेटे को आजाद उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतार सकते हैं।
संतोष कादियान की बगावत
संतोष कादियान, जो 2020 में इनेलो छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई थीं, ने टिकट कटने के बाद पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर से टिकट का भरोसा दिया गया था।
संतोष ने दावा किया कि टिकट लगभग तय होने के चलते उन्होंने करीब 1.70 लाख रुपये प्रॉपर्टी टैक्स जमा कर एनओसी भी हासिल कर ली थी, लेकिन अंतिम समय पर उनकी टिकट काट दी गई। उन्होंने पूर्व विधायक सुरेंद्र पंवार को “खलनायक” और मेयर प्रत्याशी कमल दीवान को “हारने और बिकने वाला प्रत्याशी” तक कह दिया।
सतबीर निर्माण का विरोध
जिला महामंत्री सतबीर निर्माण, जो कुमारी सैलजा गुट से जुड़े हैं, अपने बेटे राहुल के लिए वार्ड-2 से टिकट मांग रहे थे। टिकट न मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में पार्टी में शामिल हुए लोगों को तरजीह दी गई है, जबकि पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई।
पूर्व डिप्टी मेयर भी नाराज
पूर्व डिप्टी मेयर मनजीत गहलावत ने भी टिकट कटने पर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि मेयर प्रत्याशी कमल दीवान के दबाव में उनकी टिकट काटी गई। उन्होंने कहा कि वे मजबूत दावेदार थे, लेकिन अंतिम समय में सूची में बदलाव कर दिया गया।
टिकट वितरण पर कमल दीवान का पक्ष
वहीं, मेयर प्रत्याशी कमल दीवान ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि टिकट वितरण पूरी तरह ग्राउंड लेवल सर्वे और उम्मीदवारों की काबिलियत के आधार पर किया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जिताऊ उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी है और अंतिम निर्णय हाईकमान का है।
भीतरघात और अनुशासन का मुद्दा
सूत्रों के अनुसार, कुछ पार्षदों की टिकट उपचुनाव में भीतरघात के आरोपों के चलते अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत काटी गई है। हालांकि, इस फैसले ने पार्टी में असंतोष और बढ़ा दिया है।
चुनाव से पहले बढ़ी चुनौती
सोनीपत में कांग्रेस के भीतर चल रही यह खींचतान चुनाव से पहले पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि नाराज नेता निर्दलीय मैदान में उतरते हैं या खुलकर विरोध करते हैं, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।
