हरियाणा में दूध के रेट को लेकर चल रहा दूध बंद आंदोलन फिलहाल खत्म कर दिया गया है, लेकिन पशुपालकों और सरकार के बीच कीमत को लेकर टकराव अभी जारी है। सिरसा में पशुपालकों ने अब दूध की बिक्री ₹10 प्रति लीटर बढ़ाकर करने का फैसला लिया है।
पशुपालकों का कहना है कि मौजूदा रेट में उन्हें पशुओं के चारे, दवाइयों और अन्य खर्चों के मुकाबले उचित मूल्य नहीं मिल रहा। इसी मांग को लेकर प्रदेशभर में आंदोलन किया गया था।
सिरसा में हुई बैठक के दौरान आंदोलन को समाप्त करने के साथ आगे की रणनीति पर भी चर्चा हुई। पशुपालकों ने संकेत दिया है कि दूध के नए रेट को लेकर उनका रुख कायम रहेगा और सरकार से बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
अब 17 तारीख को होने वाली बैठक में पशुपालक आगे की रणनीति तय करेंगे। बैठक में सरकार के रुख और दूध के दाम से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बाद अगला फैसला लिया जाएगा।
‘दूध बंद’ आंदोलन खत्म होने के दूसरे दिन भी सिरसा में दूध के रेट बढ़ाने का मुद्दा चर्चा में है। पशुपालकों ने मौजूदा कीमत से ₹10 प्रति लीटर बढ़ाकर दूध बेचने का फैसला बरकरार रखा है। किसान नेताओं का कहना है कि फेट रेट बढ़ाने की मांग को लेकर सरकार, प्रशासन और मिल्क प्लांटों के साथ उनकी बातचीत और संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
किसान नेता जसवीर भाटी ने वीडियो जारी कर पशुपालकों से तीन दिवसीय दूध हड़ताल के दौरान मिले सहयोग की तरह आगे भी समर्थन बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार के सामने उनकी प्रमुख मांगों में नकली दूध की बिक्री पर रोक लगाना और दूध के फेट के रेट में बढ़ोतरी करना शामिल है। किसान नेता के मुताबिक, गाय के दूध के फेट का रेट ₹16 और भैंस के दूध के फेट का रेट ₹13 किए जाने की मांग है।
जसवीर भाटी ने कहा कि हड़ताल के दौरान पंचायत में लिए गए फैसले के अनुसार, राजस्थान के किसान-पशुपालकों की तर्ज पर आमजन के हित को ध्यान में रखते हुए मौजूदा भाव से ₹10 अधिक रेट पर दूध बेचने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने पशुपालकों से 17 अक्टूबर तक इसी बढ़े हुए रेट के अनुसार दूध की सप्लाई जारी रखने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर आंदोलन के दौरान दूध की सप्लाई रोकी गई थी, वहां अब दोबारा सप्लाई शुरू की जाए। दूध विक्रेताओं से भी शांतिपूर्वक दूध बेचने और किसी भी स्थान पर विवाद से बचने की अपील की गई है।
हालांकि, अब यह देखना होगा कि डेयरी संचालक, पशुपालक और दूध विक्रेता इस फैसले को किस हद तक लागू करते हैं और बढ़े हुए रेट को लेकर बाजार में क्या स्थिति बनती है।
किसान नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल दूध उत्पादकों के लिए नहीं, बल्कि दूध बेचने वालों और डेयरी संचालकों के हित को ध्यान में रखकर किया गया है। उनका तर्क है कि पिछले करीब 5 वर्षों में पशुपालन से जुड़े खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते दूध के मौजूदा रेट में बदलाव की जरूरत महसूस हुई।
आगे की रणनीति को लेकर 17 अक्टूबर को जाट धर्मशाला, सिरसा में बैठक बुलाई गई है। किसान नेताओं के अनुसार, बैठक में अधिक से अधिक डेयरी संचालक, पशुपालक और दूध उत्पादक शामिल होकर अपनी राय और सुझाव रख सकेंगे। सभी पक्षों की बात सुनने के बाद दूध के नए रेट को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
हड़ताल शुरू होने से पहले और आंदोलन के दौरान धरने पर बैठे किसान व पशुपालक गाय के दूध का रेट ₹80 और भैंस के दूध का रेट ₹100 प्रति किलो किए जाने की मांग कर रहे थे। पिछले करीब 20 दिनों से किसान-पशुपालक कई दौर की बैठकों के बाद वीटा प्लांट के बाहर धरना दे रहे थे। इसी मांग को लेकर राजस्थान और पंजाब में भी आंदोलन किया गया।
हालांकि, राजस्थान के किसान-पशुपालकों ने दूध के रेट सीधे ₹80-100 करने के बजाय मौजूदा कीमत में ₹10 प्रति किलो की बढ़ोतरी करने का फैसला लिया। किसान नेताओं के मुताबिक, इसका उद्देश्य दूध की कीमतों में अचानक बड़ी वृद्धि से आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम रखना था।
राजस्थान के फैसले के बाद सिरसा के किसान और पशुपालक भी मौजूदा रेट में ₹10 प्रति किलो बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर सहमत हुए। इसी निर्णय के बाद शनिवार को वीटा प्लांट के बाहर चल रहा धरना समाप्त कर दिया गया।
अब सरकार से फेट रेट बढ़ाने की मांग है। इसे लेकर 17 अक्टूबर तक अल्टीमेटम दिया हुआ है। उनकी 17 तारीख को जाट धर्मशाला सिरसा में मीटिंग भी होनी है। किसान-पशुपालकों ने प्रशासन व सरकार की ओर से वार्ता न करने और कोई आश्वासन न मिलने का आरोप लगाया है।
सरकार व मिल्क प्लांट वालों से भैंस का दूध फेट के हिसाब से 13 रुपए और गाय का दूध 16 रुपए फेट करने की मांग है। अगर इस पर सहमति नहीं बनी, तो ठोस फैसला लेने की चेतावनी दी है।

