हरियाणा के सरकारी विभागों से जुड़े ₹590 करोड़ के IDFC बैंक फ्रॉड केस में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो गई है। ED अधिकारियों ने मामले की जांच कर रही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को पत्र लिखकर घोटाले से संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं। दस्तावेज मिलने के बाद ED मनी लॉन्ड्रिंग के तहत एफआईआर दर्ज कर अपनी औपचारिक जांच शुरू करेगी।
सूत्रों के अनुसार ED ने इस केस में पैरलल जांच शुरू कर दी है। हाल ही में ED के अधिकारी ACB कार्यालय पहुंचे और मामले से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी ली। फिलहाल आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ नहीं हुई है, लेकिन ACB की रिमांड अवधि समाप्त होते ही ED आरोपियों को अपनी हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है।
मुख्य आरोपी रिभव ऋषि से शुक्रवार को उसके वकील की मुलाकात करवाई गई, हालांकि ACB ने करीब दस मिनट का ही समय दिया। इस दौरान अधिकारी भी मौजूद रहे। वहीं सिंगला परिवार की ओर से अभी तक वकील पेश नहीं किया गया है। रिभव ऋषि की पत्नी का नाम भी मामले में सामने आया है, लेकिन उससे अब तक पूछताछ नहीं हुई है।
ACB जांच कहां तक पहुंची?
- बैंक अधिकारियों से पूछताछ:
ACB ने चंडीगढ़ सेक्टर-32 स्थित IDFC बैंक शाखा के अधिकारियों और कर्मचारियों को तलब कर कई दौर की पूछताछ की है। आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर भी सवाल-जवाब किए गए, हालांकि अभी कोई नई गिरफ्तारी नहीं हुई है। - लैपटॉप से डेटा रिकवर:
आरोपियों के घर से बरामद लैपटॉप की फोरेंसिक जांच जारी है। आशंका है कि अहम डेटा डिलीट किया गया था। साइबर एक्सपर्ट की मदद से डेटा रिकवरी की प्रक्रिया चल रही है। कुछ निजी डायरियां भी बरामद की गई हैं, जिनमें कथित लेन-देन का हिसाब दर्ज बताया जा रहा है। - रियल एस्टेट कनेक्शन:
जांच में सामने आया है कि एक रियल एस्टेट एजेंट के माध्यम से बिल्डर से संपर्क किया गया। फ्लैट खरीदने के लिए कथित तौर पर फंड ट्रांसफर किए गए। चंडीगढ़ के एक कारोबारी और बिल्डर प्रबंधन से जुड़े लोगों की तलाश जारी है। - ज्वेलर्स से ट्रांजेक्शन डिटेल:
चंडीगढ़-पंचकूला के दो ज्वेलर्स के नाम पर हुए लेन-देन की जानकारी मांगी गई है। ACB टीम शोरूम पहुंचकर खरीददारी और भुगतान का ब्योरा मांग चुकी है, लेकिन अभी पूरी डिटेल उपलब्ध नहीं कराई गई है।
फ्रॉड में किसकी क्या भूमिका?
रिभव ऋषि (पूर्व बैंक मैनेजर):
सूत्रों के मुताबिक सेक्टर-32 स्थित IDFC बैंक शाखा का पूर्व मैनेजर इस पूरे मामले का कथित मास्टरमाइंड है। आरोप है कि उसने रिलेशनशिप मैनेजर के साथ मिलकर योजना बनाई। बताया जा रहा है कि उसने छह महीने पहले बैंक की नौकरी छोड़ दी थी।
अभय (रिलेशनशिप मैनेजर):
अभय ने अधिकारियों से संपर्क कर अपनी ब्रांच में एफडी करवाने के नाम पर लॉइजनिंग की। आरोप है कि उसने अपनी पत्नी स्वाति सिंगला और साले अभिषेक सिंगला को भी इस नेटवर्क में शामिल किया।
स्वाति सिंगला (फर्जी कंपनी की संचालक):
स्वाति ने ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ नाम से कंपनी बनाई, जिसमें उसकी 75% हिस्सेदारी बताई जा रही है। आरोप है कि कंपनी के जरिए फंड को अन्य खातों में ट्रांसफर कर प्रॉपर्टी और शेयर बाजार में निवेश किया गया।
अभिषेक सिंगला:
स्वाति के भाई अभिषेक की कंपनी में 25% हिस्सेदारी है। कथित तौर पर रियल एस्टेट में निवेश और फंड मूवमेंट की जिम्मेदारी उसी के पास थी।
