हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह की बिजली वितरण व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपने के प्रस्ताव पर विवाद गहराता जा रहा है। इस बार विरोध केवल बिजली कर्मचारी संगठनों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी सार्वजनिक रूप से इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। वहीं, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने भी हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) की जनसुनवाई में निजीकरण का विरोध दर्ज कराया है।
सूत्रों के अनुसार सरकार पहले चरण में गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। यदि यह मॉडल सफल रहा तो अगले चरण में पंचकूला और फरीदाबाद को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
HERC ने बनाई 3 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी
बढ़ते विवाद के बीच हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की है। समिति 13 जुलाई से काम शुरू करेगी और 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी। इसके बाद ही आयोग अंतिम फैसला लेगा।
समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त IAS अधिकारी आलोक निगम करेंगे। उनके साथ बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञ ई. रविंदर कुमार शर्मा और वित्त विशेषज्ञ बिभू प्रसाद महापात्र सदस्य होंगे।
30 लाख रुपए जमा कराने का आदेश
आयोग ने आवेदनकर्ता कंपनी एलवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को विशेषज्ञ समिति के खर्च के लिए 30 लाख रुपए अग्रिम जमा कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कंपनी और दोनों बिजली निगमों को एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के आदेश भी दिए गए हैं।
इन 4 वजहों से हो रहा विरोध
- कर्मचारियों की नौकरी पर संकट
निजीकरण के बाद नियमित और अनुबंधित कर्मचारियों के भविष्य, समायोजन और सेवा सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है। - DHBVN की आय पर असर
गुरुग्राम और नूंह दक्षिण हरियाणा बिजली निगम के सबसे अधिक राजस्व देने वाले जिले हैं। इनसे हर महीने करीब 777 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। अधिकारियों का कहना है कि ये जिले अलग होने से निगम की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है। - पूरे हरियाणा में निजीकरण का रास्ता
कर्मचारी संगठनों का दावा है कि गुरुग्राम और नूंह केवल शुरुआत हैं। बाद में पंचकूला, फरीदाबाद और अन्य जिलों में भी यही मॉडल लागू किया जा सकता है। - उपभोक्ताओं पर असर
बिजली विभाग का कहना है कि निजीकरण से बिजली दरों, शिकायत निवारण और उपभोक्ता सेवाओं पर क्या असर पड़ेगा, इसका पहले विस्तृत मूल्यांकन होना चाहिए।
अनिल विज बोले- जल्दबाजी ठीक नहीं
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा में किसी भी फैसले से पहले कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को सभी पक्षों की राय लेने के बाद ही कोई निर्णय करना चाहिए।
पूरा मामला क्या है?
एलवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने बिजली अधिनियम-2003 के तहत गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की मांग की है। इस प्रस्ताव का बिजली कर्मचारी संगठनों, किसान संगठनों और इनेलो समेत कई संगठनों ने विरोध किया है, जबकि उद्योग संगठनों, आरडब्ल्यूए और कुछ उपभोक्ता संगठनों ने इसका समर्थन किया है।
हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने भी आवेदन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनी का गठन सिर्फ एक वर्ष पहले हुआ है और उसकी चुकता पूंजी मात्र 1 करोड़ रुपए है, जबकि जिन जिलों में लाइसेंस मांगा गया है वहां से हर महीने करीब 777 करोड़ रुपए का बिजली राजस्व प्राप्त होता है। एसोसिएशन का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण सेवा के लिए कंपनी की तकनीकी और वित्तीय क्षमता का पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
अब पूरे मामले पर सभी की नजर HERC की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर आयोग अंतिम फैसला करेगा।
