हरियाणा के फतेहाबाद जिले में एक परिवार ने ब्रह्मभोज की परंपरा को नया रूप देकर मिसाल पेश की है। भट्टू कलां गांव में 80 वर्षीय खजानी देवी के सम्मान में उनके जीवित रहते ही ब्रह्मभोज का आयोजन किया गया। इस अनोखे कार्यक्रम में हरियाणा और राजस्थान से सैकड़ों रिश्तेदार व परिचित शामिल हुए। मेहमानों के लिए विशेष भोजन और जलेबी की व्यवस्था की गई, जबकि विदाई के समय प्रत्येक अतिथि को 3-3 किलो लड्डू भेंट किए गए।
परिवार ने इस पूरे आयोजन पर करीब 9 लाख रुपए खर्च किए। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति का वास्तविक सम्मान तभी होता है, जब वह उसे अपनी आंखों से देख और महसूस कर सके। इसलिए उन्होंने मां के जीवित रहते ही यह आयोजन करने का फैसला लिया।
रविवार रात हुआ आयोजन, डीजे पर झूम उठा परिवार
रविवार रात आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक ब्रह्मभोज के साथ-साथ खुशियों का माहौल भी देखने को मिला। परिवार के सदस्यों ने डीजे पर जमकर डांस किया और इस यादगार पल को उत्सव की तरह मनाया।
8 बेटे-बेटियों का बड़ा परिवार
खजानी देवी के पति मोडूराम का करीब 20 साल पहले निधन हो चुका है। उनके परिवार में आठ बेटे-बेटियां हैं। बेटों में सुंदर, हनुमान, गुलाब, छोटूराम और सुभाष शामिल हैं, जबकि बेटियां धर्मा देवी, लाली देवी और भानी देवी हैं। इनमें बेटी लाली देवी और छोटे बेटे सुभाष का निधन हो चुका है।
परिवार कई पीढ़ियों से लोहे के औजार बनाने के पुश्तैनी व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। आज भी परिवार के सदस्य भट्टू कलां में रहकर यही काम कर रहे हैं।
हरियाणा और राजस्थान से पहुंचे रिश्तेदार
इस अनोखे ब्रह्मभोज में फतेहाबाद के भट्टू, रतिया, पारता, सिरसा के बाजेकां, हिसार और राजस्थान के नोहर, मुंसरी व मिराण सहित कई स्थानों से रिश्तेदार पहुंचे।
परिवार का कहना है कि माता-पिता का सम्मान केवल उनके निधन के बाद नहीं, बल्कि उनके जीते-जी होना चाहिए। उनका मानना है कि सबसे बड़ा सुख यही है कि बुजुर्ग अपने सम्मान और परिवार के प्रेम को अपनी आंखों से देख सकें।
13 पोते-पोतियां और 11 दोहते-दोहतियां
खजानी देवी के बेटे छोटूराम ने बताया कि उनकी मां 80 वर्ष की उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ हैं। वह अपना अधिकांश काम स्वयं करती हैं और पानी की टोकरी तक उठाकर ले आती हैं। उनके परिवार में 13 पोते-पोतियां और 11 दोहते-दोहतियां हैं।
गांव में यह अनोखा ब्रह्मभोज चर्चा का विषय बना हुआ है। बड़ी संख्या में लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे बुजुर्गों के सम्मान की अनूठी मिसाल बताया।


