रोहतक के डी-पार्क मार्केट में लगी भीषण आग ने तीन लोगों की जान ले ली और करीब एक दर्जन दुकानों को तबाह कर दिया। शुरुआती तौर पर आग लगने की वजह एसी का कंप्रेसर फटना बताई जा रही है, लेकिन हादसे की भयावहता सिर्फ एक तकनीकी खराबी का परिणाम नहीं थी। प्रत्यक्षदर्शियों और दुकानदारों के अनुसार शुरुआती स्तर पर हुई कई चूकों ने आग को इतना विकराल बना दिया कि कुछ ही घंटों में पूरी मार्केट इसकी चपेट में आ गई।
आग अब भले ही बुझ चुकी हो, लेकिन पीछे छोड़ गई है तीन परिवारों का दर्द, करोड़ों रुपये का नुकसान और कई ऐसे सवाल जिनके जवाब अब भी तलाशे जा रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि यदि समय रहते बचाव के पर्याप्त इंतजाम होते तो नुकसान और जनहानि दोनों को काफी हद तक रोका जा सकता था।
- फायर ब्रिगेड की देरी ने बढ़ाया नुकसान
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के शुरुआती मिनटों में ही लपटें तेजी से फैलने लगी थीं। आरोप है कि फायर ब्रिगेड के मौके पर पहुंचने में देरी हुई, जिससे आग को फैलने का पर्याप्त समय मिल गया। शुरुआती आधे घंटे में आग पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका और देखते ही देखते यह एक दुकान से निकलकर आसपास के प्रतिष्ठानों तक पहुंच गई।
- एक्सपायर फायर एक्सटिंग्विशर बने बेकार
दुकान में मौजूद कर्मचारियों और आसपास के लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन फायर एक्सटिंग्विशर प्रभावी साबित नहीं हुए। बताया जा रहा है कि कई अग्निशमन यंत्र दो साल पहले ही एक्सपायर हो चुके थे। यदि शुरुआती स्तर पर आग को दबा दिया जाता तो शायद यह इतना बड़ा रूप नहीं लेती।
- बंद शटर के पीछे फंस गईं जिंदगियां
हादसे का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि आग के दौरान रोहतक शूज शोरूम का शटर नीचे आ गया। अंदर मौजूद कर्मचारी अमन, कपिल और सौरभ बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ़ सके। धुएं और आग के बीच उनकी जान बचाने का मौका लगातार कम होता गया। प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है कि यदि बाहर निकलने का रास्ता खुला रहता तो तीनों की जान बच सकती थी।
- जलते वाहनों ने आग को और भड़काया
जब आग शोरूम से बाहर निकली तो आसपास खड़ी 11 बाइक और स्कूटी इसकी चपेट में आ गईं। वाहनों की टंकियों में भरे पेट्रोल ने आग को और तेज कर दिया। एक के बाद एक वाहन जलने लगे, जिससे तापमान बढ़ता गया और आग बुझाने का काम और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया।
- ज्वलनशील सामान ने बढ़ाई मुश्किल
दुकानों में बड़ी मात्रा में रबर, जूते, कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामग्री रखी हुई थी। आग लगने के बाद यह सामान लगातार जलता रहा, जिससे घना धुआं और तेज गर्मी पैदा होती रही। यही कारण रहा कि आग पर पूरी तरह काबू पाने और कूलिंग ऑपरेशन पूरा करने में कई घंटे लग गए।
दुकानदारों ने बयां किया दर्द
कैलाश बूट हाउस के संचालक पीयूष ने बताया कि उनकी दुकान पिछले 50 वर्षों से संचालित हो रही थी। उन्होंने शटर बंद कर सामान बचाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी दुकान जलकर खाक हो गई। हालांकि पिछले गेट से निकलकर उन्होंने और कर्मचारियों ने अपनी जान बचा ली।
शू प्लाजा के मालिक राजेश जुनेजा ने कहा कि तेज हवा के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया। उन्होंने दावा किया कि यदि दमकल की गाड़ियां समय पर पहुंच जातीं तो नुकसान काफी कम हो सकता था। उन्होंने यह भी बताया कि उनके एक कर्मचारी की बाइक भी आग में जल गई।
फुट लुक वियर के मालिक रविंद्र यादव ने कहा कि आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। ऊपर से गिरती आग और धुएं के कारण कर्मचारी बाहर नहीं निकल सके। उन्होंने सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की है।
वहीं शिव जनरल स्टोर के मालिक जगदीश चंद्र ने बताया कि आग लगने के समय वह दुकान में मौजूद थे। उन्हें शटर तक बंद करने का समय नहीं मिला। आग से दुकान के साथ-साथ उनके घर को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने 25 से 30 लाख रुपये के नुकसान का दावा करते हुए मुआवजे की मांग की है।
डी-पार्क अग्निकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बाजारों में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन कितना गंभीरता से किया जाता है। तीन लोगों की मौत और करोड़ों के नुकसान के बाद अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार है, जो बताएगी कि इस त्रासदी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
