हरियाणा के भिवानी में लेडी टीचर मनीषा की मौत के मामले में उनके पिता संजय ने आमरण अनशन पर बैठने का ऐलान किया है। रविवार को ढाणी लक्ष्मण गांव में हुई महापंचायत में संजय ने कहा, “मैं अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए DC कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठूंगा। मैं आम लोगों से अपील करता हूं कि इस न्याय की लड़ाई में मेरी मदद करें।”
मामले को लेकर गठित संघर्ष समिति ने सरकार को 21 दिन का अल्टीमेटम दिया है। समिति का कहना है कि यदि तय अवधि के भीतर न्याय नहीं मिला तो 29 जून से DC कार्यालय के बाहर आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
पिछले साल 13 अगस्त को मनीषा की डेडबॉडी मिली थी। परिवार ने हत्या के आरोप लगाए थे। इस मामले की जांच CBI कर रही है। परिवार का कहना है कि अभी तक CBI ने इस केस में खुलासा नहीं किया है।
महापंचायत में कमेटी के सदस्य मेवा सिंह आर्य ने कहा, “हमें यह संकल्प लेना होगा कि मनीषा को अपनी बेटी मानकर उसे न्याय दिलाएं। हम शुरू से ही संवैधानिक तरीके से यह लड़ाई लड़ रहे हैं। आज पूरे हरियाणा से विभिन्न खापों के प्रतिनिधि यहां पहुंचे हैं। कमेटी ने सरकार को 21 दिन का समय देने का फैसला किया है। यदि इस अवधि में न्याय नहीं मिला तो 29 जून से भिवानी स्थित DC कार्यालय के बाहर अनशन शुरू किया जाएगा।

शिक्षिका मनीषा मौत मामले में न्याय की आस लगाए बैठे परिजनों और सामाजिक संगठनों का सब्र अब जवाब देने लगा है। रविवार को भिवानी के ढाणी लक्ष्मण गांव में प्रदेशभर की खापों, किसान यूनियनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ा। भीषण गर्मी को देखते हुए पंचायत घर परिसर में 180 गुना 45 फीट का विशाल टेंट लगाया गया था, जहां हजारों लोगों ने शिरकत की। महापंचायत में पहुंचे पूर्व विधायक ओमप्रकाश गोरा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मामले में लगातार लीपापोती की कोशिश की जा रही है। जांच सीबीआई के पास है, लेकिन हैरानी की बात है कि इतने गंभीर मामले का अब तक कोई तार्किक नतीजा सामने नहीं आ पाया है।
अंतिम सांस तक बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराते हुए मनीषा के पिता संजय ने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया, “कुछ समय पहले हमारी मुलाकात सीबीआई के उच्च अधिकारियों से हुई थी, जहां हमें भरोसा दिलाया गया था कि अगले 15 दिनों के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट और सच को सामने रख दिया जाएगा। मगर वह समय सीमा बीते भी कई दिन हो चुके हैं, लेकिन एजेंसी की तरफ से कोई हलचल नहीं दिख रही है। इसी उदासीनता के चलते आज हमें यह महापंचायत बुलानी पड़ी है।”
यह मामला पिछले साल का है, जिसने पूरी कानून-व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया था। घटनाक्रम के अनुसार:
11 अगस्त: मनीषा हमेशा की तरह अपने प्ले स्कूल की ड्यूटी पर गई थी। वहां से उसने नर्सिंग कॉलेज में दाखिले के सिलसिले में जाने की बात कही, लेकिन वह शाम तक घर नहीं लौटी।
13 अगस्त: दो दिनों की तलाश के बाद मनीषा का शव गांव सिंघानी के सुनसान खेतों में संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ। परिवार ने तुरंत सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की आशंका जताते हुए मामला दर्ज कराया।
18 अगस्त: पुलिस ने शुरुआती तफ्तीश के बाद मामले को आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया, जिससे जन आक्रोश भड़क उठा और बड़े पैमाने पर धरने-प्रदर्शन शुरू हो गए।
आंदोलन का असर: जनता के भारी दबाव और आंदोलन के उग्र रूप को देखते हुए प्रशासन बैकफुट पर आया। शव का तीसरी बार दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल में मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमॉर्टम कराया गया और निष्पक्षता के लिए जांच देश की सबसे बड़ी एजेंसी सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई।
महापंचायत में विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया गया है। तोशाम और चरखी दादरी सहित कई जिलों से आए दिग्गज किसान नेताओं—कामरेड रामकुमार मलिक, राकेश आर्य और जोगेंद्र नैन—की मौजूदगी में नवगठित कमेटी ने साफ कर दिया कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। यदि 29 जून तक सीबीआई ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट सार्वजनिक कर आरोपियों को बेनकाब नहीं किया, तो पूरा भिवानी जिला प्रशासनिक रूप से ठप करने की रणनीति तैयार की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
