पंचकूला में हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) के ऑफिस का घेराव करने पहुंचे युवाओं को पुलिस ने घसीट-घसीट कर गाड़ियों में डाला। कुछ युवतियों को भी हिरासत में लिया गया। ये युवा सरकारी भर्तियों में 35% के क्राइटेरिया का विरोध कर रहे हैं। युवाओं का तर्क है कि इस क्राइटेरिया की वजह से बहुत से पद खाली ही रह रहे हैं।
5 महीने से पंचकूला के सेक्टर-5 में धरना चल रहा है। बुधवार को आयोग के सेक्टर-4 स्थित दफ्तर का घेराव करने का कार्यक्रम था। युवाओं के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने 5 डीएसपी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया।
युवाओं के संगठन ओबीसी ब्रिगेड के नेतृत्व में जैसे ही प्रदर्शन आयोग के दफ्तर की तरफ बढ़ने लगे, पुलिस ने बल का प्रयोग किया। JJP नेता दिग्विजय चौटाला प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने पहुंचे थे, हालांकि पुलिस ने उन्हें पहले ही रोक लिया गया।
प्रदर्शन का नेतृत्व करने वालों में शामिल गुरमेल डाबी ने बताया कि हरियाणा सरकार बिहार के चेयरमैन आलोक वर्मा को युवाओं पर थोप रही है। जिस कारण यूपी-बिहार के लोगों को यहां पर नौकरियां दी जा रही हैं। ग्रुप ए एवं बी की भर्तियों में 35 प्रतिशत क्राइटेरिया रखना भी गलत है।
- 35 प्रतिशत क्राइटेरिया का विरोध : हरियाणा के युवा ग्रुप ए एवं बी की भर्तियों में 35 प्रतिशत क्राइटेरिया का विरोध कर रहे हैं। हर भर्ती में 35 प्रतिशत क्राइटेरिया के कारण सीटें खाली रह जाती हैं। जिसके चलते 5 माह से युवा विरोध कर रहे हैं।
- बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता: युवाओं का आरोप है कि HPSC की ग्रुप-ए और ग्रुप-बी (राजपत्रित) भर्तियों में हरियाणा के मूल निवासियों को छोड़कर दूसरे राज्यों (विशेषकर भाजपा शासित राज्यों) के अभ्यर्थियों को 90% तक नौकरियां दी जा रही हैं।
- योग्य युवाओं की अनदेखी: प्रदर्शनकारियों के अनुसार, हरियाणा के जो युवा PhD, NET या MTech क्वालिफाइड हैं, वे बेरोजगार घूम रहे हैं या उन्हें चपरासी जैसे निचले पदों पर काम करना पड़ रहा है, जबकि उच्च पदों पर बाहरी लोगों को बैठाया जा रहा है।
HPSC की परीक्षाओं में 35 प्रतिशत क्राइटेरिया का मतलब मुख्य परीक्षा (Mains) या लिखित परीक्षा में न्यूनतम पासिंग मार्क्स हासिल करने की अनिवार्य शर्त है। कई भर्तियों (जैसे कॉलेज कैडर असिस्टेंट प्रोफेसर आदि) में इस 35 प्रतिशत की शर्त के कारण बहुत से अभ्यर्थी असफल हो गए और हजारों पद खाली रह गए।
हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) के चेयरमैन आलोक वर्मा 1989 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी रहे हैं। वे मूल रूप से बिहार के भागलपुर के रहने वाले हैं, लेकिन उन्होंने लंबे समय तक हरियाणा कैडर में सेवाएं दी हैं। आलोक वर्मा को अक्टूबर 2020 में हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। उन्होंने इस पद के लिए समय पूर्व सेवानिवृत्ति (VRS) ली थी। उनका कार्यकाल अक्टूबर 2026 तक है। HPSC में आने से पहले वे हरियाणा सरकार में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF), मुख्य वन्यजीव वार्डन और पर्यटन व वन विभाग में प्रधान सचिव जैसे पदों पर रह चुके हैं। वे मनोहर लाल खट्टर सरकार में एडीसी (टूर) भी रहे थे और उनके कार्यक्रमों की जिम्मेदारी संभालते थे।
दो दिन पहले इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला के नेतृत्व में पंचकूला स्थित HPSC कार्यालय का घेराव की कोशिश की गई। इस दौरान पुलिस के साथ तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। बाद में राज्यपाल के नाम प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया।
इसी साल फरवरी में रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में भी प्रदर्शन हुआ था। तब दीपेंद्र पुलिस के लगाए बैरिकेड फांद गए थे। जिसके बाद पुलिस प्रशासन की ओर से वॉटर कैनन का प्रयोग किया गया।

