पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों राज्य सरकारों को बड़ा निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि हर जिला अस्पताल में कम से कम एक सीटी स्कैन मशीन, एक एमआरआई मशीन और एक आईसीयू होना अनिवार्य है।

साथ ही हाईकोर्ट ने डॉक्टरों के हजारों खाली पदों को भरने के लिए तुरंत भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान जारी किया।

हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। इसलिए यह अपेक्षा की जाती है कि हर जिला अस्पताल में आधुनिक जांच और गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हों।

हर जिला अस्पताल में कम से कम एक CT स्कैन मशीन हो। हर जिला अस्पताल में कम से कम एक MRI मशीन हो। हर जिला अस्पताल में जरूरत के अनुसार बेड वाला ICU हो। इन मशीनों का संचालन अस्पताल के अपने स्टाफ द्वारा किया जाए। डॉक्टरों और विशेषज्ञों के खाली पदों पर तुरंत भर्ती निकाली जाए।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निजी कंपनियों पर नहीं डाल सकती। CT स्कैन और MRI जैसी सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में सरकार को खुद उपलब्ध करानी चाहिए। ये बहुत ही गंभीर मामला, लेकिन सरकारें इसको बहुत ही हल्के में लेती हैं।

सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के आंकड़ों के अनुसार, मेडिकल ऑफिसर (जनरल) के स्वीकृत पद 3,665, मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट) के स्वीकृत पद 2,050 कुल रिक्त पद लगभग 2,877 हैं। इनमें 2,042 पद सामान्य चिकित्सा अधिकारियों के, 835 पद विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली हैं।

हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को भी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि हरियाणा सरकार के हलफनामे में यह तक स्पष्ट नहीं किया गया कि सामान्य और विशेषज्ञ डॉक्टरों के कितने पद खाली हैं। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई और विस्तृत जानकारी देने को कहा है।

बता दें कि, यह मामला मालेरकोटला के सिविल अस्पताल की सुविधाओं को लेकर दायर जनहित याचिका से शुरू हुआ था। सुनवाई के दौरान सामने आया कि अस्पताल में ICU तक नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि जिला अस्पतालों में ऐसी बुनियादी सुविधाओं का न होना गंभीर चिंता का विषय है।

हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा, दोनों सरकारों को आदेश दिया है कि वे, आवश्यक मशीनों की व्यवस्था करें, डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करें, और 6 जुलाई तक अनुपालन रिपोर्ट अदालत में पेश करें।

इस आदेश से जिला अस्पतालों में गंभीर बीमारियों की जांच और इलाज की सुविधाएं बेहतर होने की उम्मीद है। मरीजों को CT स्कैन, MRI और ICU के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हाईकोर्ट का यह फैसला सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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