वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज और हरियाणा के संत गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज की भेंट का वीडियो अनुयायियों में श्रद्धा का केंद्र बना है। इसमें ज्ञानानंद महाराज वृंदावन में प्रेमानंद महाराज का स्वास्थ्य हाल पूछने गए। वहां संत ने चरण धोकर और दंडवत होकर स्वागत किया।
वृंदावन में मुलाकात पर ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि प्रेमानंद महाराज एक ऐसे संत हैं, जिन्होंने समाज में नाम और भक्ति के प्रति गहरा भाव जगाया है। जब वह वृंदावन पहुंचे, तो प्रेमानंद महाराज ने बहुत ही विनम्रता के साथ उनका स्वागत किया।
ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को जानने के लिए ही वह वृंदावन गए थे। वहां जाकर पता चला कि वह थोड़ा अस्वस्थ हैं, लेकिन वह मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि जब हम उनसे मिले, तो उन्होंने गहरे भाव दिखाए और हमें लगा कि यह उनका बड़प्पन है। जब संत अपने किसी भाव की स्थिति में होते हैं, तो उनकी विनम्रता और भी बढ़ जाती है। प्रेमानंद महाराज का यही स्वभाव उनकी महानता को दर्शाता है।
ज्ञानानंद महाराज ने बताया कि उस समय वहां कई संत उपस्थित थे। चर्चा के दौरान प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आप समाज में सरल भाषा में गीता का प्रचार कर रहे हैं, यह अत्यंत सराहनीय कार्य है। गीता के एक भाव पर सात्विक चर्चा भी हुई। दोनों संतों ने भगवत गीता के संदेशों को आज के समाज में लागू करने के महत्व पर विचार साझा किए।
उन्होंने प्रेमानंद महाराज के उत्तम स्वास्थ्य के लिए भगवान से विशेष प्रार्थना भी की। भगवान उन पर कृपा बनाए रखें और वे शारीरिक रूप से भी जल्द स्वस्थ हों, क्योंकि मानसिक रूप से वे पूर्णत: संतुलित और दृढ़ हैं।
करनाल पहुंचे गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि कार्तिक मास में पांच दिनों का समय हनुमान जयंती, धनतेरस, दीवाली, अन्नकूट और भैया दूज, ये पांचों दिन विशेष माने जाते हैं। कभी कभी ऐसा हो जाता है कि अपने यहां त्योहारों का जो भाव होता है, वो केवल एक तारीख को लेकर नहीं होता। अपने यहां त्योहार तिथियों के अनुसार होता है और तिथियों में बहुत कुछ देखा जाता है, जिसमें नक्षत्र, लगन, ग्रह व अन्य कुछ बातों का ध्यान रखा जाता है।
जहां तक दीवाली की बात है, वह 20 अक्टूबर को ही है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि यदि हम अपने त्योहारों की एक कसौटी बना लें, तो बहुत अच्छा रहेगा। जहां का जो त्योहार है, यानी केंद्र वहां पर किस दिन त्योहार मनाया जा रहा है, उसके हिसाब से मनाएं। अयोध्या में 20 को ही दीवाली है, क्योंकि 21 अक्तूबर को रात को अमावस्या का अंश नहीं है।

प्रेमानंद महाराज पॉलिसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD) जैसी गंभीर जेनेटिक बीमारी से जूझ रहे हैं। इस बीमारी के कारण उनकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं, और रोजाना डायलिसिस कराना पड़ता है, ताकि शरीर का खून साफ किया जा सके। यह स्थिति पिछले लगभग दो दशकों से बनी हुई है। उन्होंने अपनी किडनियों को ‘राधा’ और ‘कृष्णा’ नाम दिए हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, उनकी शेष जीवन संभाव्यता पहले केवल 2 से ढाई साल बताई गई थी, परंतु उनकी सकारात्मक सोच ने उन्हें वर्षों तक जीवित और मानसिक रूप से शांत बनाए रखा है।
हालांकि, हाल ही में कुछ अफवाहें फैल गई थीं कि वग गंभीर रूप से बीमार हैं या ब्रह्मलीन हो गए हैं। इन अफवाहों का खंडन करते हुए, प्रेमानंद महाराज ने स्वयं कहा कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। हाल ही में, उन्होंने वृंदावन के राधा केली कुंज आश्रम से लगभग 200 मीटर की पदयात्रा की, जिससे उनके भक्तों को दर्शन मिल सके और अफवाहों को विराम मिला।
