साहिबजादा दिवस : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के चार बेटों की शहादत को याद करते हुए अपने सरकारी आवास पर साहिबजादा दिवस मनाया। इस मौके पर उनके आवास पर आयोजित गुरबानी कीर्तन में भी उन्होंने शिरकत की। 

मुख्यमंत्री अपने आवास से पवित्र साहिब को अपने सिर पर लिए प्रार्थना करते हुए नजर आए। इस खास मौके पर उन्हें भगवा पगड़ी पहने हुए सभी अनुष्ठानों का पालन करते हुए देखा गया है। साथ ही अन्य मंत्रियों और अधिकारियों के साथ सीएम योगी ने ग्रंथ साहिब को लेकर एक ‘परिक्रमा’ भी की।

इससे पहले दिन में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के चार ‘साहिबजादों’ को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने ट्विटर पर पोस्ट शेयर किया था। जिसमें उन्होंने कहा कि ‘साहिबजादा दिवस’ हमें हमेशा अत्याचार और अधर्म के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित करेगा।

26 दिसंबर 1704 में गुरु गोबिंद सिंह के दो साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को इस्लाम धर्म कबूल न करने पर सरहिंद के नवाब ने दीवार में जिंदा चुनवा दिया। साहिबजादों की शहादत धर्म को बचाने के लिए की गई। फतेहगढ़ साहिब मे गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादों को दीवार में सिर्फ इसलिए चिनवा दिया गया कि उन्होंने अपना धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म नहीं अपनाया।

सरहिंद पर वो पुण्य भूमि थी जहां कण-कण से आवाज़ आती थी कि “सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं”। गुरु गोविंद सिंह जी के चार पुत्रों अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह की शहादत की याद में यह दिवस मनाया जाता है।

उत्तर प्रदेश साहेबजादा दिवस मनाने वाला पहला राज्य है। मुख्यमंत्री आवास पर हुए गुरबाणी कीर्तन में मुख्यमंत्री सहित सरकार के कई मंत्री और अध‍िकारी शामिल रहे। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्‍यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश सिंह समेत कई प्रमुख लोग शामिल हुए। राज्य के मंत्री बलदेव सिंह औलख ने मुख्‍यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि योगी जी से पहले किसी मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास में कभी ‘कीर्तन’ और ‘लंगर’ का आयोजन नहीं किया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने जय शंकर गुरुद्वारा गोरखपुर को एक करोड़ रुपए, गुरुद्वारा मोहदीपुर को एक करोड़ 94 लाख, गुरुद्वारा चरण पादुका साहिब निजामाबाद (आजमगढ़) को 49 लाख 22 हजार करोड़ रुपए की धनराशि दी है।

हर साल साल 27 दिसंबर को सिख गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादों की शहादत के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन को ‘शक सरहिंद’ के नाम से भी जाना जाता है, सिख समुदाय के लिए प्रमुख महत्व रखता है। साहिबजादे फतेह सिंह और जोरावर सिंह जिसे इस दिन जिंदा दफनाया गया था, सहित गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों के सर्वोच्च बलिदान को मनाने के लिए पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में एक ‘शहीदी जोर मेला’ भी आयोजित किया जाता है।  

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