हरियाणा के जींद में बिना दहेज हुई शादी चारों ओर चर्चा का विषय बनी हुई है। कंप्यूटर इंजीनियर दूल्हे ने 1 रुपया लेकर शादी की। इस दौरान दूल्हे ने कहा कि दुल्हन ही सबसे बड़ा दहेज होती है। कंप्यूटर इंजीनियर दूल्हे ने बिना दहेज के शादी कर समाज में मिसाल पेश की है।

रिश्ता जोड़ते समय ही युवक ने यह शर्त रख दी थी कि वह किसी भी प्रकार दहेज नहीं लेंगे। शगुन के तौर पर केवल 1 रुपया लेकर शादी के बंधन में बंधेंगे। संपन्न परिवार होते हुए भी शादी में किसी तरह का अनावश्यक खर्च नहीं किया गया। मेहमानों को पौधे गिफ्ट किए गए

प्राप्त जानकारी अनुसार सुंदरपुर गांव के रहने वाले रोहित ने 6 मार्च को जींद की दीक्षा गिल के साथ सात फेरे लिए। दीक्षा के पिता सुनील गिल खरकरामजी सीएचसी में एमपीएचडब्ल्यू के पद पर तैनात हैं। वहीं रोहित की मां कविता देवी सुनील की सहकर्मी हैं। दोनों के बीच बेटे-बेटी के रिश्ते की बात चली। रोहित ने कहा कि वह बिना दहेज के शादी करेंगे। इस पर दोनों परिवार सहमत हो गए। 6 मार्च को कार्यक्रम का आयोजन कर एक रुपया शगुन लेकर रोहित और दीक्षा शादी के बंधन में बंध गए।

सुंदरपुर निवासी रोहित ने बताया कि उनकी व उनके माता-पिता की इच्छा थी कि वह बिना दहेज के दुल्हन को अपने घर लाएं। उनका यह मानना है कि दुल्हन ही दहेज है, जो समाज के लिए भी एक अच्छी सीख है। रोहित ने बताया कि वह आस्ट्रेलिया में कंप्यूटर इंजीनियर हैं। दीक्षा दिल्ली में ज्योग्राफी इनफोटैक में पीजी कर रही हैं। दीक्षा के पिता सुनील गिल ने कहा कि वह अपनी बेटी को शादी में दान-दहेज देना चाहते थे। लेकिन दामाद की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा।

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