किसान आंदोलन को आज एक साल पूरा हो गया। नए कृषि कानूनों की वापसी की प्रक्रिया भले ही शुरू हो गई, लेकिन MSP समेत दूसरी मांगों को लेकर किसान आज टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर शक्ति प्रदर्शन करेंगे। टीकरी बॉर्डर के पास सेक्टर-13 में 7 एकड़ क्षेत्र में किसान महापंचायत शुरू हो गई है। किसान नेता जोगिंदर सिंह उग्राहां महापंचायत में पहुंच गए हैं।

उग्राहां ने कहा कि किसान की मांग पर जवाब अभी नहीं आया है। संयुक्त मोर्चा के पत्र का जवाब आ जाएगा तो किसान घर चले जाएंगे। MSP समेत दूसरी मांगों पर भी फैसला होना अभी बाकी। यह पंचायत किसानों की जीत का जश्न मनाने के लिए है। संघर्ष का एलान करने के लिए महापंचायत की है और जब तक मुक्कमल मांग पूरी नहीं होगी घर वापसी नहीं होगी। घर वापस जाने का मन करता है, लेकिन अभी सरकार के जवाब का इंतजार है। किसानों के दिल में एक तरफ कृषि कानूनों की वापसी की खुशी है, तो दूसरी तरफ आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले साथी किसानों की मौत का गम भी नजर आ रहा है। वहीं, टीकरी बॉर्डर पर पंचायत के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई है। पैरामिलिट्री के जवानों की तादाद भी अधिक हुई है। टीकरी बॉर्डर पर 6 फुट का रास्ता दोपहिया वाहनों के लिए खुला है।

भारतीय किसान यूनियन एकता (उग्राहा) की तरफ से सेक्टर-13 में यह महापंचायत आयोजित की जा रही है। इसमें संयुक्त किसान मोर्चा के तमाम नेताओं को बुलाया गया है। BKU एकता (उग्राहा) के कार्यकारी प्रधान जसविंदर सिंह ने बताया कि पिछले दो दिन में 20 हजार से ज्यादा किसान टीकरी बॉर्डर पर पहुंच चुके हैं। इसके अलावा सिंघु बॉर्डर पर भी काफी किसान पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि महापंचायत में आंदोलन की रणनीति पर चर्चा के साथ ही एक साल की तमाम गतिविधियों पर किसान नेता अपने विचार रखेंगे। इधर टीकरी बॉर्डर पर भी सुबह से ही चहल-पहल बढ़ गई है।

19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान के बाद से ही किसानों के जत्थे लगातार टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। गुरुवार की रात से शुक्रवार की सुबह तक हजारों की संख्या में और भी किसान टीकरी बॉर्डर पर पहुंचे हैं। किसान अपने साथ राशन-पानी सब लेकर आए हैं। इससे साफ है कि किसानों ने आंदोलन को खत्म करने की बजाय आगे भी जारी रखने की रणनीति बनाई है। 50 से ज्यादा ट्रैक्टरों में पंजाब से किसान सिर्फ खाद्य सामग्री ही लेकर पहुंचे हैं। किसान नेता पहले ही कह चुके हैं कि MSP की गारंटी कानूनी और अन्य मांगों को मनवाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

दिल्ली से सटे हरियाणा के सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन को शुक्रवार को एक साल पूरा हो गया। प्रधानमंत्री की कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के साथ ही 24 नवंबर को इन कानूनों की वापसी पर केन्द्रीय कैबिनेट की मोहर भी लग चुकी है, लेकिन उसके बाद भी आंदोलन खत्म होने की बजाय किसानों ने दोनों बॉर्डर पर आंदोलन की सालगिरह मनाने का ऐलान किया। इसकी वजह है MSP पर गारंटी कानून और अन्य तमाम मुद्दे। साथ ही किसान एक बार फिर ताकत दिखाना चाहते हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा ने संसद सत्र शुरू होने पर 29 नवंबर से हर दिन सिंघु और टीकरी बॉर्डर से 500-500 किसानों के साथ संसद तक ट्रैक्टर मार्च करने का कार्यक्रम तय किया हुआ है। इसके साथ ही आज बड़ी संख्या में किसानों की भीड़ जुटाने का दावा किया है। इसको देखते हुए दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा पुलिस भी अलर्ट हो चुकी है। चूंकि एक माह पहले ही किसान संगठनों के साथ बातचीत के बाद दिल्ली पुलिस की तरफ से टीकरी बॉर्डर पर की गई भारी-भरकम बैरिकेडिंग हट चुकी है।

आंदोलन के शुरू होने से अब तक 700 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है। इसमें कई लोग सड़क हादसों में मारे गए। इतना ही नहीं, काफी किसान टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर ही मृत मिले। इनमें सबसे ज्यादा मौत हार्टअटैक से हुई हैं। आज आंदोलन का एक साल पूरा होने पर किसान नेता आंदोलन में मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके साथ ही आंदोलन की आगामी रूपरेखा की भी घोषणा करेंगे।

YouTube
YouTube
Set Youtube Channel ID
WhatsApp
error: Content is protected !!