नहाय खाय के साथ मंगलवार को छठ का महापर्व शुरू हुआ। 7 नवंबर को श्रद्धालु नहर घाट पर पहुंचकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे। वहीं आठ नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसको लेकर मंगलवार को भी सिंचाई विभाग, पी​डब्ल्यूडी दिनभर घाट की ओर जाने वाले रास्ते पर काम करता रहा। विधायक भारत भूषण बतरा ने रास्ता ठीक करवाने के लिए 8 ट्रॉला मिट्टी डलवाने का प्रबंध कराया है। बुधवार को गोशाला साइड से रास्ते को दुरुस्त किया जाएगा। पूर्वांचल एकता सेवा समिति के प्रधान संजीव सिंह ने बताया कि नहर पर बने छठ घाट को विद्युत झालरों को सजाने का काम शुरू किया गया है। बुधवार शाम तक पूजा की पूरी तैयारी कर ली जाएंगी।

नहर पर किसी को दिक्कत न हो इसके लिए वॉलेंटियर भी लगाए जाएंगे। छठ महापर्व के पहले दिन व्रतियोंे ने नहर पर बने छठ घाट जाकर स्नान किया। नए वस्त्र धारण कर भगवान को अर्घ्य अर्पित कर आराधना की। घर लौटकर शाम को परंपरा के अनुसार देसी घी में बनी घीया की सब्जी, रोटी, चने की दाल और भात का भोजन केले के पत्ते पर किया। इसके साथ ही रात में जमीन पर ही विश्राम किया। ^छठ घाट पर पानी की कमी न हो इसके लिए सिंचाई विभाग ने खुबड़ूहेड से 400 क्यूसिक पानी छोड़ा है। जो बुधवार को भालौठ बांच में पहुंचेगा। -अरुण मुंजाल, एक्सईएन भालौठ सब ब्रांच नहर।

YouTube
YouTube
Set Youtube Channel ID
WhatsApp
error: Content is protected !!