रोहतक में हिमांशु गर्ग ने आज पुलिस अधीक्षक कार्यालय स्थित सभागार मे राजपत्रित अधिकारियों व सभी प्रभारी थाना/चौकी के साथ बैठक कर उन्हें नए आपराधिक कानूनों का पाढ़ पढ़ाया है। नए आपराधिक कानून 01 जुलाई 2024 से लागू होने वाले है। रोहतक पुलिस द्वारा 01 जुलाई से नए आपराधिक कानूनों के तहत ही आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे तथा नए कानूनों के तहत ही कार्यवाही की जाएगी। इस दौरान उप जिला न्यायवादी ममता राठी, उप पुलिस अधीक्षक रवि खुंडिया, विवेक कुंडु, राजीव कुमार, विद्यानंद, राकेश कुमार, विरेंद्र सिंह व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
पुलिस अधीक्षक श्री हिमांशु गर्ग ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023 को प्रभावी तरीके से लागू करने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। तीन नये कानूनो को सही तरीके से लागू करने के लिये सभी प्रभारी थाना अपने थानो मे तैनात आईओ को बताये और उन्हें प्रशिक्षित करे। तीन नये कानून 1 जुलाई 2024 से लागू होगे। नए कानूनों में कई नए अध्याय जोड़े गए है। पुलिस जांच के तरीके में भी काफी बदलाव किए गए है। रोहतक पुलिस द्वारा सभी अनुसंधान अधिकारियों को नए कानूनों के बारे में अवगत कराया गया है तथा समय-2 पर कार्यशाला का भी आयोजन किया जा रहा है ताकि रोहतक पुलिस द्वारा प्रभावी रूप से नए कानूनों को लागू किया जा सके।
सीआरपीसी में जहां कुल 484 धाराएं थीं वहीं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराएं हैं। कुल 177 ऐसे प्रावधान हैं जिसमें संशोधन हुआ है। 9 नई धाराएं व कुल 39 उपधाराएं जोड़ी गई हैं। और 14 धाराओं को निरस्त कर दिया गया है। बीएनएसएस, 2023 में सबूतों के मामले में ऑडियो-विडियो इलेक्ट्रॉनिक्स तरीके से जुटाए जाने वाले सबूतों को प्रमुखता दी गई है। नए कानून में किसी भी अपराध के लिए जेल में अधिकतम सजा काट चुके कैदियों को उसके निजी बांड पर रिहा करने का प्रावधान रखा गया है। वहीं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में कुल 170 धाराएं होंगी। पहले के इंडियन एविडेंस एक्ट के तहत कुल 167 धाराएं थी। 6 धाराओं को निरस्त किया गया है और 2 नई धाराएं व 6 उप धाराओं को जोड़ा गया है। भारतीय न्याय संहिता में कुल 358 धाराएं हैं और उसमें 20 नए अपराध को परिभाषित किया गया है।
जिनमें स्नेचिंग से लेकर मॉब लिंचिंग शामिल किया गया है। साथ ही 33 अपराधों में सजा को बढ़ाया गया है। साथ ही 83 ऐेसी धाराएं या अपराध हैं जिनमें जुर्माने की राशि भी बढ़ा दी गई है। ऐसे 23 अपराध हैं जिनमें न्यूनतम सजा का जिक्र नहीं था जिसमे न्यूनतम सजा को शुरू किया गया है। 19 धाराएं ऐसी हैं जिन्हें हटा दिया गया है। साथ ही सजा के तौर पर सामाजिक व समुदायिक सेवा को भी रखा गया है। यह पहले नहीं था। राजद्रोह जैसे अपराध को अब नए कानून में हटा दिया गया। संहिता की धारा-113 में आतंकवाद से संबंधित परिभाषा और सजा का प्रावधान है।
