पीजीआईएमएस हरियाणा का नामी संस्थान। इसमें हर बीमारी का इलाज करने के लिए डॉक्टर हैं। आसपास के अधिकांश जिलों के छोटे अस्पतालों से यहां पर मरीज इलाज के लिए रेफर किए जाते हैं। लेकिन, यहां भी उन्हें समुचित इलाज मिलने के बजाए रेफर का लेटर ही पकड़ा दिया जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण यहां पर बेडों की कमी माना गया है।

जबकि कई बार एससीआई की ओर से बेड़ बढ़ाने की बात कही जा चुकी है। पीजीआईएमएस के ट्रॉमा सेंटर में रोजाना भर्ती के लिए 500 और इमरजेंसी में 600 मरीज पहुंचते हैं। जबकि इमेरजेंसी में भर्ती मरीजों के लिए मात्र 30 बेड और ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी के मरीजों के लिए 30 बेड, आर्थों के मरीजों के लिए 30 बेड आरक्षित हैं। ऐसे में मरीजों को भर्ती करना संभव नहीं होता। इन मरीजों की संख्या को देखते हुए यहां का स्टॉफ इलाज से पहले ही बिना कुछ लिखे उन्हें दूसरी जगह ले जाने की सलाह देता है। ऐसे में मरीज के तीमारदार उसे प्राइवेट अस्पताल में ले जाने को मजबूर हो जाते हैं।

तीमारदारों से पहले ही लिखवा लेते हैं अपनी मर्जी से ले जा रहे हैं मरीज पीजीआई में केवल 150 वेंटिलेटर हैं। जबकि हादसे में घायल होकर आने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। इसके अलावा गंभीर रूप से बीमार मरीज को भी वेटिलेटर की जरूरत होती है। ऐसे में डॉक्टर मरीज के आने पर साफ तौर पर उसे किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने की सलाह दे देते हैं। कई बार तीमारदार भी संसाधन न होने पर से अपने मरीज को ले जाने के लिए राजी हो जाता है। इसके लिए तीमारदार से साफ तौर पर लिखवा लिया जाता है कि वह अपनी मर्जी से दूसरे अस्पताल में ले जा रहा है।

पीजीआईएमएस में मरीजों को बेहतर इलाज दिया जा रहा है। इमरजेंसी में इलाज की जरूरत वाले मरीजों को प्राथमि​कता के तौर पर भर्ती किया जाता है। कुछ चीजों के लिए प्रक्रिया चल रही हैं। जिससे सुविधाएं और भी बेहतर हो जाएंगी। कुंदन मित्तल चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस

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