हरियाणा सरकार और क्लर्क एसोसिएशन के सदस्यों के बीच दूसरे दौर की आज मीटिंग होगी। मीटिंग में मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, फाइनेंस डिपार्टमेंट के अधिकारी और CM के OSD होंगे। हरियाणा में अपनी मांगों को लेकर 5 जुलाई से क्लर्क हड़ताल पर चल रहे हैं। पे ग्रेड बढ़ाने की की क्लर्कों की मुख्य मांग है।

इससे पहले क्लर्कों और सरकार के बीच हुई मीटिंग बेनतीजा रही थी। मीटिंग में मुख्यमंत्री के OSD जवाहर यादव के सामने आंदोलनरत क्लर्कों ने अपनी मांगे रखीं थीं, लेकिन बात नहीं बन पाई।

क्लर्कों की मांगों को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने रखा गया था। इसके बाद फिर से आंदोलन कर रहे क्लर्कों को मीटिंग में बुलाया गया है। जवाहर यादव का कहना है कि क्लर्क एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल के साथ आज फिर मीटिंग है।

राजस्व अदालतों का कामकाज भी इस हड़ताल की वजह से प्रभावित हुआ है। अनुमान के अनुसार हरियाणा में क्लर्कों की हड़ताल से हर रोज करीब 200 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। पिछले 15 दिनों से चल रही इस हड़ताल की वजह से अभी तक करीब तीन हजार करोड़ रुपए के राजस्व के नुकसान की रिपोर्ट है।

प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री के OSD जवाहर यादव को क्लर्क एसोसिएशन के साथ बातचीत करने के लिए अधिकृत किया था, लेकिन क्लर्क 35 हजार 400 रुपए का बेसिक-पे देने की जिद्द पर अड़े रहे, जिस कारण वार्ता सिरे नहीं चढ़ी। ओएसडी ने साफ मना कर दिया था कि इतना वेतन सरकार नहीं दे सकती, जबकि क्लर्कों का कहना है कि उनके समकक्ष अन्य कर्मचारियों को यही वेतन दिया जा रहा है, इसलिए वह यही वेतन लेकर रहेंगे। यह धरने हर जिले में चल रहे हैं।

क्लर्क चाहते हैं कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल से वार्ता कराई जाए। वर्तमान में क्लर्क का बेसिक वेतन 19 हजार 900 रुपए है और वे इसे बढ़ाकर 35 हजार 400 रुपए करने की मांग कर रहे हैं। अगर क्लर्कों की बेसिक-पे बढ़ती है तो उसी हिसाब से सहायकों, उपाधीक्षकों और अधीक्षकों की बेसिक-पे तय की जाएगी। यही कारण है कि इन तीनों कैटेगरी के कर्मचारी भी क्लर्कों के साथ हड़ताल में शामिल हैं।

हरियाणा सरकार की और से यह स्पष्ट किया गया है कि सरकार क्लर्कों की मांग पर सकारात्मक रुख अपनाए हुए है। उनके खिलाफ सरकार की और से कोई भी दंडात्मक कार्रवाई फिलहाल नहीं की जाएगी।

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