हरियाणा रोडवेज कर्मचारी अब 1 मार्च से आंदोलन की राह पर जाने वाले हैं। केंद्रीय सदस्य ओमप्रकाश ग्रेवाल व रोहतक डिपो प्रधान सुरेश नेहरा ने कहा कि सरकार द्वारा बजट सत्र में 1000 बसे किलोमीटर स्कीम तहत ठेके पर लेने का निर्णय लिया है। जिसको वापस लेकर प्रदेश की जनसंख्या आधार पर सरकारी बसे बेड़े में शामिल करें। सरकार ने 2018 में भी इस स्कीम को लागू किया।

उस समय भी रोडवेज कर्मचारियों व आम जनता ने इस स्कीम का विरोध किया और मजबूरी में 18 दिन की हड़ताल करनी पड़ी। कर्मचारियों व आम जनता की मांग पर सरकार ने पूरे मामले की जांच विजिलेंस से कराई तो जहां सरकार 35 से 38 रुपए प्रति किलोमीटर ठेके के हिसाब से बसें ले रही थी। जांच के बाद दोबारा से टेंडर लिए तो रेट 26 रुपए 99 पैसे तय हुआ। जो एक बड़ा घोटाला था।

पंचायतों सहित के जनप्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर सरकार को रेजुलेशन देकर सरकारी बसों की मांग की जाती रही हैं। कर्मचारियों द्वारा पूरे प्रदेश में हस्ताक्षर अभियान चलाकर इस स्कीम का विराध किया और जनता की भावना को सरकार तक पहुंचाया। प्राइवेट परमिट व ठेके पर किलोमीटर स्कीम बसे लेने की किसी जनता व कर्मचारी की मांग नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार आम जनता की आवाज ना सुनकर अपने चहेतों को लाभ पहुंचने के लिए इन स्कीमों को लागू कर कर रही। ठेके पर ली गई बसों पर बिना अनुभव के चालक आम जनता की जानमाल से खिलवाड़ कर रहे हैं। सरकार लगातार विभाग व कर्मचारी विरोधी नीतियों को लागू कर रही हैं।

चेतावनी दी कि कर्मचारियों की जायज मांगों पर समझौता होने के बाद भी मांगों को लागू नहीं कर रही। जिससे कर्मचारियों में सरकार के प्रति रोष हैं। सांझा मोर्च ने कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ पूरे प्रदेश में 1 मार्च से 4 टीमें बनाकर गेट मीटिंग करेंगा। अगर सरकार कर्मचारी व विभाग विरोधी नीतियों को वापस नहीं लेती तो 12 मार्च को परिवहन मंत्री के आवास फरीदाबाद में घेराव किया जाएगा।

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