कानपुर के घाटमपुर में शनिवार रात 50 श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली तालाब में गिर गई थी। हादसे में 26 लोगों की मौत हो गई। वहीं 10 से ज्यादा घायल हैं। बताया जा रहा है कि सभी श्रद्धालु उन्नाव के चंद्रिका देवी मंदिर में दर्शन कर लौट रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे से मौके पर चीख पुकार मच गई। जो बचे हुए लोग थे, वह गांव की तरफ मदद लाने के लिए दौड़ गए। गांव से ग्रामीण दो ट्रैक्टर लेकर आए। लगभग 100 से 50 आदमी भी वहां पर आ गए। लोगों ने खंती में पलटी पड़ी ट्राली को सीधा किया।

30 से ज्यादा लोग ट्रैक्टर ट्रॉली में तालाब में दब गए थे। हम लोगों को वहां पर पहुंचने में करीब 40 से 45 मिनट लगे होंगे। गांव वालों ने जब तालाब में दबे और डूबे लोगों को निकालना शुरू किया तो उनमें ज्यादातर बेहोश निकल रहे थे। इनमें से कई की मौत तो मौके पर ही हो गई थी।
ट्राॅली सीधी होने पर कुछ बच्चे और महिलाएं चीखकर बाहर निकली। लेकिन अधिकतर लोगों का कहीं कुछ पता नहीं था। लोगों ने पानी में ढूंढ़ना शुरू किया। एक-एक करके ग्रामीण बाहर निकाल रहे थे और इलाज के लिए लेकर अस्पताल पहुंचा रहे थे। एंबुलेंस भी समय से नहीं पहुंची लोग अपनी बाइक से जैसे तैसे लेकर पहुंचे। लेकिन अधिकतर लोगों की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले हो गई। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पुलिस की गाड़ी पड़ोस में ही खड़ी थी लेकिन काफी देर तक वह मदद के लिए नहीं आए। अगर समय रहते उनकी सहायता मिली होती तो कई लोगों की जान बच सकती थी।

ट्रैक्टर से चंद्रिका देवी से दर्शन करके वापस आ रहे थे। तभी ट्रैक्टर-ट्राली अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे से कुछ ही दूरी पर पुलिस प्रशासन की जीप खड़ी थी। वह लोग चाहते तो ट्राली के नीचे पानी में दबे लोगों को बचाया जा सकता था। लोगों की मदद से ट्रॉली को सीधा किया जा सकता था और लोगों को बचाया जा सकता था। हम जो दो से तीन लोग ट्रैक्टर पर सवार थे वह बच गए थे। उसके बाद हम दौड़ कर अपने गांव गए और वहां से दो ट्रैक्टर व 100 आदमी लेकर आए जिसके बाद ट्राली को सीधा किया। एंबुलेंस भी काफी देरी से पहुंची। हम लोग मोटर साइकिल से महिलाओं और बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचे लेकिन हम बचा नहीं पाए।
हम तो ट्राॅली में बैठे थे। ट्रैक्टर आराम से चल रहा था। रफ्तार थोड़ा तेज थी लेकिन इतनी भी तेज नहीं थी। अचानक हमें पता नहीं चला और ट्रैक्टर-ट्राली पलट गई। ट्राली में बैठे सभी लोग खंती में गिर गए और उनके ऊपर ट्राली आग गई। फिर कुछ पता हीं नहीं चला।

वहीं घायल रामशंकर ने बताया कि हमारी ट्रैक्टर आराम से सड़क पर चल रही थी। सामने से एक वाहन और आ रहा था। लाइट लगने की वजह से ड्राइवर को गड्ढा नहीं दिखाई दिया। जब चालक ने गड्ढ़ा देखा तो उसने बचाने की कोशिश की। इसी में ट्रैक्टर-ट्राली अनियंत्रित हो गई और खंती में जाकर पलट गई। हम ट्राली पर सवार थे। ट्राली पलटने से पहले हम उसमें से कूद गए, जिसके चलते हमारा हाथ टूट गया। जब घायल से पूछा गया कि यहां अस्पताल में कैसी व्यवस्थाएं थीं। तो उसने कहा कि कोई व्यवस्था नहीं थी आप मेरे हाथ का प्लास्टर देख लो।

जानकारी के अनुसार, कोरथा के रहने वाले राजू निषाद अपने बच्चे का मुंडन कराने रिश्तेदारों संग चंद्रिका देवी मंदिर गए थे। राजू ही ट्रैक्टर चला रहा था। घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया जा रहा है कि तीन चार जो लोग कूद गए, वो ही बचे हैं।

घटना की जानकारी मिलने के बाद एम्बुलेंस मौके पर भेजे गए। हालांकि स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण एम्बुलेंस देरी से पहुंची। अगर एम्बुलेंस सही समय पर पहुंचती तो और लोगों की जान बच सकती थी। माना जा रहा है कि ट्रैक्टर के अंदर दबे लोगों की दम घुटने से मौत हुई है। फिलहाल राहत कार्य जारी है। मौके पर सांसद देवेंद्र सिंह भोले और विधायक अभिजीत सिंह सांगा भी पहुंच गए हैं।
कानपुर हैलेट मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला ने बताया कि अस्पताल में 2 बच्चों की मौत डूबने से हुई है। इनके नाम 3 वर्ष की दिव्या और 12 साल की रंजना है। एडमिट बाकी 4 लोग की हालत खतरे से बाहर है।
