हरियाणा में 3.50 करोड़ के पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति (PMS) घोटाले में IAS संजीव वर्मा के खिलाफ अदालत ने जमानती वारंट जारी किए हैं। चंडीगढ़ की अदालत द्वारा इस मामले में बयान दर्ज कराने के लिए अफसर के खिलाफ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन वह पेश नहीं हुए।

संजीव वर्मा ने मार्च 2019 में हरियाणा के अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग विभाग के निदेशक रहते हुए इस घोटाले का खुलासा किया था। इस मामले में चंडीगढ़ में मुकदमा भी दर्ज किया गया। प्राथमिक जांच के बाद विभाग के कुछ अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया गया था।

यह धाराएं लगी थीं

PMS घोटाले में IPC की 420, 409, 467, 468, 471 और धारा 12, 13 (1)(D) और 13 (2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ था। इसके अलावा रोहतक में भी सतकर्ता विभाग ने इसी मामले में मुकदमा दर्ज किया।

चंडीगढ़ पुलिस इस मामले को रद्द करना चाहती है। इसलिए पुलिस की ओर से कोर्ट में घोटाले में दर्ज प्राथमिकी में अदालत के समक्ष रद्दीकरण की रिपोर्ट दायर की गई। पुलिस का कहना है कि चूंकि हरियाणा सतर्कता विभाग ने मुकदमा दर्ज कर लिया है, इसलिए प्राथमिकी रद्द की जा सकती है।

IAS खेमका के साथ चल रहा विवाद

हरियाणा के चर्चित IAS अशोक खेमका के साथ संजीव वर्मा का विवाद चल रहा है। पंचकूला पुलिस में 26 अप्रैल को एक-दूसरे के खिलाफ FIR दर्ज करा चुके हैं। हालांकि इस मामले में मामले में सरकार ने वर्मा को झटका देते हुए खेमका को राहत दी है।

CM ऑफिस ने पुलिस को खेमका के खिलाफ मामला दर्ज करने से पहले की तारीख में केस दर्ज करने की इजाजत देने से मना कर दिया है। भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी IAS अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज करने से पहले सरकार की मंजूरी लेनी होती है, जबकि खेमका के मामले में ऐसा नहीं किया गया।

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