शिक्षा विभाग ने छठी से आठवीं कक्षा के स्कूलों काे 23 जुलाई से खाेलने की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन शिक्षा विभाग की कमजोर तैयारियों से अभिभावकों में रोष है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर विद्यार्थियों के पास न ही पढ़ने के लिए किताबें हैं औैर न ही अभी तक बच्चों के खातों में किताब खरीदने के लिए धन राशि डाली गयी। स्कूल खुलने के केवल एक ही दिन शेष हैं, लेकिन अधिकारियों की माने तो विद्यालय शिक्षा निदेशालय की तरफ से अभी तक किताबों, यूनिफाॅर्म व जूतों के रुपए विद्यार्थियों के खातों में डालने संबंधी कोई पत्र नहीं मिला है। 16 जून से शिक्षा विभाग की ओर से ऑनलाइन माेड के माध्यम से स्कूल शिक्षकों काे क्लास लगाने के निर्देश दे दिए गए थे, लेकिन मुद्दा यह था कि बच्चों के पास किताब नहीं होने के कारण वह अपनी पढ़ाई जारी कैसे रख सकेंगे। ज्यादतर विद्यार्थी सीनियर की किताबों से पढ़ रहे हैं।

तो ऐसा लगता है कि कल से सरकारी स्कूल के विद्यार्थी बिना यूनिफार्म व किताबों के ही पढने आयेंगे। एक तरफ तो सरकार साक्षरता अभियान चला रही है तो वहीं गरीब विद्यार्थी को साक्षर बन्ने लायक उपयुक्त साधन भी मुहय्या करवाने में सरकार विफल सी होती दिख रही है। ऐसे में आप ही सोचें कोई विद्यार्थी कैसे पढ़ पायेगा।

जानकारी के लिए बता दें किताबें खरीदने के लिए विभाग की ओर से सीधे विद्यार्थियों के अकाउंट में रुपए डाले जाते हैं। शिक्षा विभाग की ओर से विद्यार्थियों की संख्या का डेटा भी एमआईएस पोर्टल से डायरेक्ट उठाया जाता है। लेकिन हैरान कर देने वाली तो यह है कि अभी तक किताबों के रुपये डालने संबंधी कोई पत्र सम्बन्धित कार्यकारिणी को नहीं मिला है।

You missed

YouTube
YouTube
Set Youtube Channel ID
WhatsApp
error: Content is protected !!