रोहतक जिले में निकाय चुनाव के लिए मात्र 4 दिन शेष रह गए हैं और प्रचार के लिए मात्र तीन दिन बचे हैं। ऐसे में मेयर और पार्षद प्रत्याशी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। 2 मार्च को मतदान के बाद कौन जीतेगा और कौन हारेगा, इसका फैसला जनता के हाथ में है। फिलहाल प्रत्याशी जनता के बीच जाकर वोट मांगने में जुटे हैं। पूरा इलाका निकाय चुनाव के प्रत्याशियों के प्रचार से गुलजार है।

प्रत्याशियों के प्रचार में सैकड़ों गाड़ियां लगी हुई हैं। वहीं प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ घर-घर जाकर वोट की अपील भी कर रहे हैं। ज्यादातर वार्डों में एक तरफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन मतदान के दिन जनता किसे वोट देगी, इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। अगर वार्डों की बात करें तो हर वार्ड में अलग-अलग तरह के समीकरण उभर कर सामने आ रहे हैं।

कुछ वार्डों में ओबीसी समुदाय का प्रभाव ज्यादा है, तो कुछ वार्डों में पंजाबी समुदाय का दबदबा है। कलानौर क्षेत्र के निगम वार्डों में एससी समुदाय का दबदबा नजर आ रहा है। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि किस वार्ड में कौन जीत रहा है। हालांकि, हर कोई जीत के लिए पूरी कोशिश कर रहा है।

भाजपा से पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर अपने भाषणों में 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन का जिक्र करना नहीं भूलते। निकाय चुनाव के प्रचार के दौरान भी उन्होंने कई बार इस घटना का जिक्र किया है। वोट मांगते समय वह अक्सर कांग्रेस की भूपेंद्र हुड्डा सरकार के 10 साल के कामों को गिनाने लगते हैं।

आरोप-प्रत्यारोप लगाने में कांग्रेस भी पीछे नहीं है। सांसद दीपेंद्र हुड्डा अपने भाषण में अमृत योजना के 350 करोड़ रुपए के घोटाले का जिक्र करते नजर आए। दीपेंद्र ने अब तक दो जगहों पर जनसभाएं की हैं और दोनों जगहों पर अमृत योजना घोटाले को सामने लाने की कोशिश की है। उन्होंने भाजपा के पूर्व मंत्री पर रोहतक को बर्बाद करने का भी आरोप लगाया है।

भाजपा और कांग्रेस जहां पूरी जांच-पड़ताल के बाद जातिगत समीकरण साधने में जुटी हैं, वहीं पार्षद प्रत्याशी भी अपने वर्ग को साधने की कोशिश में जुटे हैं। पूरे वार्ड में वोट मांगने के साथ ही जातिगत समूह को साधने की कोशिशें ज्यादा की जा रही हैं। कुछ वार्डों में पार्षद सिर्फ अपना चुनाव लड़ रहे हैं, उनके पोस्टर और फ्लेक्स से मेयर की फोटो गायब है।

YouTube
YouTube
Set Youtube Channel ID
WhatsApp
error: Content is protected !!