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कोरोना वैक्सीनेशन के 12 घंटे में युवक की मौत: पहली डोज से सांस लेने में हुई दिक्कत

हरियाणा के जींद के नरवाना में कोरोना वैक्सीन लगवाने के करीब 12 घंटे बाद युवक मोहित (24) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उसे पहली डोज लगी थी। परिजनों के अनुसार रात को सांस लेने में दिक्कत होने पर उसे सरकारी अस्पताल लाए, लेकिन डॉक्टरों ने केयर नहीं की। हिसार ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में वह ब्रॉडडैड लाया गया था। गुस्साए परिजन मृतक का पोस्टमार्टम न कराने पर अड़े है और अस्पताल परिसर में ही धरना शुरू कर दिया है। पुलिस मौके पर है।

नरवाना के आजाद नगर निवासी नरेश कुमार ने बताया कि उसके बेटे मोहित ने सोमवार दोपहर के समय नागरिक अस्पताल में कोरोना वैक्सीन का टीका लगवाया था। उसके बाद उसे सांस लेने में कुछ दिक्कत हुई थी। पुत्र को समझा कर वह घर ले गए थे कि कोरोना का टीका लगवाने के बाद थोड़ी बहुत दिक्कत तो आती ही है।

शाम को उसने खाना भी खाया और रात को करीब 10:00 बजे वह फिर कहने लगा कि उसे सांस लेने में दिक्कत है। इस पर अपने साले के साथ मोहित को लेकर फिर नागरिक अस्पताल गए, वहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। कोई इंजेक्शन आदि भी लगाया गया, मगर हालत ठीक नहीं लगी। मोहित को हम रात के समय ही हिसार ले गए, मगर उसने रास्ते में दम तोड़ दिया।

मोहित की मौत के साथ ही नरेश के परिवार का इकलौता चिराग बूझ गया है। उसकी शादी हो चुकी थी। कुछ माह पहले मोहित की पत्नी ने बेटा जन्मा था। बच्चे की आंगन में गूंजी किलकारी से सभी खुश थे, लेकिन बच्चे की मौत हो गई। अब मोहित के जाने से परिवार मातम मे है। नरेश की इंदिरा कॉलोनी में दुकान थी। मोहित उसी पर बैठता था। परिजनों के अस्पताल में ही आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे थे।नरेश के अनुसार इस मामले में नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों ने कोताही बरती है। इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।

नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डा. देवेंद्र बिंदलिश ने कहा कि इलाज में किसी तरह की कोताही नहीं बरती गई है। जिस डॉक्टर की रात को ड्यूटी थी उसने बताया है कोई मामूली सांस लेने में दिक्कत तो थी मगर कोई ऐसी सीरियस प्रॉब्लम नहीं थी। फिर भी परिजन इलाज के बीच में ही मोहित को लेकर चले गए। अब ब्रॉडडैड लाया गया है। मामले की पूरी जांच की जाएगी और मृतक का पोस्टमार्टम भी किया जाएगा।

इकलौते बेटे की मौत से परिजन दुखी के साथ गुस्सा भी हैं। उन्होंने लापरवाह डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग को लेकर अस्पताल में रोष जताया है। बेटे के शव का पोस्टमार्टम कराने से भी मना कर दिया है। पहले वे डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगा कर मृतक मोहित के परिजनों ने दोपहर बाद नागरिक अस्पताल में धरना शुरू कर दिया है। उन्होंने हाथों में बोर्ड पकड़े हैं। जिन पर लिखा है कि कोरोना की पहली डोज लेने के बाद उनके बेटे की मौत हुई है। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही ने ही उनके बेटे की जान ली है। उन्होंने मोहित का शव लेने से भी मना कर दिया है। पुलिस प्रशासन उनको मनाने में लगा है, लेकिन वो कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।

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