Site icon Digital Bhoomi – Haryana's Leading News Plate form and Weekly Newspaper Get latest Haryana News

सपनों की कीमत मौत! नीदरलैंड में हादसे का शिकार हुआ सोनीपत का युवक, शव लाने को तरसा परिवार

हरियाणा के सोनीपत के युवक की नीदरलैंड में हादसे में मौत हो गई। परिवार ने करीब 25 लाख रुपए का कर्ज लेकर दो साल पहले फ्रांस भेजा था। मगर, कुछ दिन फ्रांस में रहने के बाद युवक नीदरलैंड चला गया और काम की तलाश शुरू की। कई दिन तक रोजगार की तलाश करने के बाद उसे पेड़ काटने का काम मिला।

पेड़ काटते वक्त वह हादसे का शिकार हो गया। कई दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। अब हालात ऐसे हैं कि उसका पार्थिव शरीर भी विदेश में ही फंसा हुआ है और परिवार आर्थिक तंगी के चलते उसे भारत नहीं ला पा रहा।

परिजन लगातार सरकार और प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि उनके बेटे का शव वतन लाने में मदद की जाए, ताकि वे अंतिम बार उसका चेहरा देख सके और अपने हाथों से अंतिम संस्कार कर सके।

कमल राणा के अनुसार उनके परिवार के हालात लंबे समय से ठीक नहीं थे। परिवार के पास केवल एक बीघा जमीन है और आय का कोई स्थायी साधन नहीं है। गांव में अपना मकान जर्जर हालात में है, इसलिए वे गांव में अपने काका के मकान में किराए पर रह रहे हैं। पिता किराए की गाड़ी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जिससे घर का खर्च किसी तरह चलता है। ऐसे में सागर ने विदेश जाकर मेहनत करने और परिवार का कर्ज उतारने के साथ-साथ अपना खुद का मकान बनाने का सपना देखा था। सागर ने अपनी 12वीं की पढ़ाई कसांडी गांव से पूरी की थी।

कमल राणा के मुताबिक सागर को विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 20 से 25 लाख रुपए तक का कर्ज लिया था। उम्मीद थी कि सागर विदेश में कमाकर इस कर्ज को उतार देगा और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बना देगा। सागर रोजाना अपनी मां और परिवार के अन्य सदस्यों से बात करता था। लेकिन 20 मार्च को उसका फोन नहीं आया। परिवार ने उसे मैसेज भी किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बाद में उसकी मौत की खबर आई। उसकी असमय मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

वर्तमान में सागर का पार्थिव शरीर नीदरलैंड में ही है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, जिसके कारण वे खुद शव को भारत नहीं ला पा रहे हैं। परिजन लगातार सरकार और प्रशासन से मदद की अपील कर रहे हैं, ताकि सागर का अंतिम संस्कार उसके अपने देश और अपने लोगों के बीच हो सके और परिवार आखिरी बार अपने बेटे को देख सके।

Exit mobile version