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कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार जीता सोना,कोच और परिवार ने किया मोटिवेट:साक्षी मलिक

कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार गोल्ड मेडल जीतने वाली हरियाणा के रोहतक की पहलवान साक्षी कभी कुश्ती छोड़ने की सोच रही थी। इसके पीछे का कारण अच्छा प्रदर्शन न होना था, लेकिन कोच और परिवार ने उनकी इस सोच को हावी होने नहीं दिया। उन्होंने साक्षी को ​​​​​​मोटिवेट किया, जिसका रिजल्ट शुक्रवार को इंग्लैंड के बर्मिंघम में दिखा।

साक्षी मलिक ने कॉमनवेल्थ गेम में अपने करियर का पहला गोल्ड मेडल जीता। इससे पहले कॉमनवेल्थ गेम, एशियन गेम और ओलिंपिक में केवल कांस्य और रजत पदक ही जीत पाईं थी। इस बार कॉमनवेल्थ गेम में उनका गोल्ड मेडल जीतने का सपना पूरा हुआ। अब अगला लक्ष्य एशियन गेम में गोल्ड मेडल जीतना है।

साक्षी मलिक ने कहा कि जब उन्होंने कैंप जॉइन किया तो उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं चल रहा था। जिसके कारण उनकी कुश्ती छोड़ने तक की सोच बन गई थी। क्योंकि लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं हो रहा था। इसके बाद कोच व परिवार ने उन्हें मोटिवेट किया और वह लगातार अभ्यास करती रही। इसका परिणाम यह हुआ कि पहले ट्रायल में अच्छा प्रदर्शन किया और फिर गोल्ड मेडल जीत लिया।

साक्षी मलिक ने कहा कि उनके पति सत्यव्रत कादियान का भी पूरा साथ रहा है। हमेशा ही मोटिवेट करते रहे हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में चयन से पहले कादियान ने कहा था कि अगर भगवान यह पूछेगा कि कौन एक कॉमनवेल्थ में जाएगा तो मैं तुम्हारा नाम लूंगा। वही हुआ और अपने वेट में एक नंबर होते हुए भी सत्यव्रत कादियान नहीं जा पाए।

उन्होंने कहा कि उनका यह पहला गोल्ड मेडल है। सपना था कि वह गोल्ड मेडल जीते और वह अब पूरा हो गया है। इससे पहले लग रहा था कि क्या पता उनके लिए राष्ट्रीय गान बज पाएगा या नहीं या फिर कुश्ती ही छोड़ देंगी। जब शुक्रवार को गोल्ड मेडल मिलने पर राष्ट्रीय गान बजा और वह भावुक हो गईं।

साक्षी ने कहा कि वे पहले राउंड में 4-0 से पीछे थी, लेकिन उन्हें खुद पर विश्वास था कि वे वापसी करेंगी। पहले भी कई मुकाबले अंतिम कुछ मिनट में जीते हैं। अंतिम तीन मिनट में अटैक करने की सोच के साथ खेल जारी रखा। गेम में भी वही हुआ और अंतिम तीन मिनट में जाते ही अटैक किया और जीत हासिल की।

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