भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर अभी भी रहस्य बना हुआ है, और इस बीच बेंगलुरु में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की संभावित तारीखें भी टलने की खबरें आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक यह बैठक, जो पहले 18 से 20 अप्रैल के बीच होनी थी, अब आगे बढ़ सकती है – जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि नेतृत्व को लेकर तस्वीर अब तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।

बीते कुछ महीनों से यह चर्चा ज़ोरों पर है कि बीजेपी जल्द ही नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा कर सकती है, लेकिन हर बार यह फैसला आगे खिसकता दिख रहा है। अब बेंगलुरु बैठक की संभावित देरी ने एक बार फिर इस अटकल को हवा दी है कि पार्टी नेतृत्व के अहम फैसले को लेकर अभी इंतजार बाकी है।

आमतौर पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी जैसी बड़ी बैठक की तैयारियों की जानकारी पार्टी नेताओं को पहले ही दे दी जाती है, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक, अब तक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी बैठक को लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। ऐसे में बैठक की तारीखों का टलना लगभग तय माना जा रहा है।

इस देरी की एक प्रमुख वजह संगठनात्मक चुनावों की धीमी प्रगति मानी जा रही है। बीजेपी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले देश के कम से कम 50% प्रदेशों में संगठनात्मक चुनाव पूरे होने चाहिए। कुल 36 प्रदेशों में से अब तक केवल 13 में ही यह प्रक्रिया पूरी हो पाई है। यानी जब तक 19 प्रदेशों में चुनाव नहीं हो जाते, तब तक अध्यक्ष पद पर किसी नाम का ऐलान करना पार्टी के नियमों के अनुरूप नहीं होगा।

ऐसे में माना जा रहा है कि पहले नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का ऐलान होगा और फिर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें इस नाम पर औपचारिक मुहर लगेगी। फिलहाल पार्टी के भीतर भी कई नेता इस मामले में अनभिज्ञ हैं, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व इस बार बेहद सोच-समझकर और रणनीतिक तरीके से नया अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया को अंजाम देना चाहता है।

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