कहा जाता है कि बेटियों का जन्म सौभाग्य से होता है. बेटियां प्रेम-समर्पण और सुख-समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है. लेकिन कलयुग में बेटियों का वह स्थान कहीं खो सा गया है. जो हिंदू धर्म की संस्कृति और पुराणों में बताया है. इसलिए अमूमन बेटियों के साथ क्रूरता और अन्याय की दुर्भाग्यपूर्ण खबरें सामने आती है. ताजा मामला हिसार से सामने आया है. जहां कलयुगी मां ने बच्ची को जन्म देने के बाद झाड़ियों में फेंक दिया. बच्ची के रोने की आवाज सुनकर एक किसान उसे अपना सौभाग्य समझकर घर में लाया तो घर की खुशियां दोगुनी हो गई.
हिसार अग्रोहा के कूलेरी गांव के पगड़ी संभाल जट्टा किसान यूनियन के ब्लॉक समिति सदस्य सतीश डूडी ने नवजात बेटी को अपनाया और बच्ची को परिवार देकर अहम भूमिका अदा की है. सतीश के घर परिवार में इस समय परिवार में 10 बुआ, 2 बहने और भतीजी है. इनका पूरा परिवार महिलाओं से भरा हुआ है. सतीश ने बेटी को गोद लिया है. बच्ची को घर पर लाकर परिवार ने हवन यज्ञ कराया. बच्ची को लक्ष्मी मानकर उसके पैरों की सिंदूरी छाप ली गई. पिता सतीश अपनी बेटी का पालन-पोषण कर उसे कामयाबी की मंजिल तक पहुंचाना चाहते हैं.
परिजनों ने इस बच्ची का नाम किस्मत रखा है. समिति के प्रधान केडी अग्रोहा ने कहा कि यह पहल कर समाज को नई दिशा देने का काम किया है. बाल संरक्षण अधिकारी सुनीता यादव ने कहा कि बच्ची को नियमानुसार गो दे दिया गया है. बता दें कि हिसार के रहने वाले एक परिवार ने अग्रोहा मेडिकल में बच्ची को जन्म देने के बाद झाड़ियों में फेंक दिया था. सतीश ने इस बच्ची के रोने की आवाज सुनी और उसे अग्रोहा मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया.
किस्मत के घर आने से परिवार की खुशियां दोगुनी हो गई है और घर पर जश्न का माहौल है. सतीश टूडी ने बताया कि नवजात शिशु को 5 मई को झाड़ियों में देखा गया था. उनके कमेटी के सदस्य बजरंग जाखड़ ने बच्ची को अस्पताल पहुंचाया था. इस बेटी को बाल कल्याण व अग्रोहा मेडिकल की टीम से गोद लिया गया है. सतीश ने बताया कि बच्ची को गोद लेने के लिए 60-70 परिवार पहुंच गए थे. लेकिन यह बेटी उन्हें बड़े ही भाग्य से मिली है.
सतीश ने बताया कि बच्ची को रोता देख मन में इंसानियत जाग गई. तो उस बच्ची को अपना लिया. उनके घर में 12 साल का एक बेटा बीरेंद्र भी है, जो 7वीं क्लास में पढ़ता है. सतीश की पत्नी कैलाश देवी भी बच्ची को अपनाकर काफी खुश है. पुलिस से पता चला है कि अग्रोहा पुलिस ने इसको लेकर पहले दंपत्ति की तलाश की. दंपत्ति हिसार के ही रहने वाले हैं. उस दंपति के दो बेटी और दो बेटे हैं. इस बच्ची को जन्म देने के बाद यहां झाड़ियों में छोड़ गए थे.
पुलिस ने बताया कि मां ने जन्म लेते ही बच्ची को झाड़ियों में फेंक दिया था. लेकिन रोने की आवाज सुनी तो सतीश ने उस बच्ची को अपना लिया है. हिसार के अग्रोहा के थाना प्रभारी रिशाल सिंह ने बताया कि “एक महिला जो बच्चे को झाड़ियां में फेंक कर चली गई थी. उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. उसे अरेस्ट भी किया गया था. .बाद में उसे जमानत मिल गयी”.
