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छोटा कैलाश को ये क्या हुआ? ओम पर्वत से गायब हुआ OM, बर्फ की जगह रह गया काला पहाड़

उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ क्षेत्र से कैलाश मानसरोवर जाने वाले रास्ते पर स्थित ओम पर्वत अब गायब हो चुका है। जी, हां  करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र रही ओम की आकृति गायब हो गई है अब यहां सिर्फ देखने को बचा है काला पहाड़। ओम पर्वत की ऐसी हालत देखकर स्थानीय लोगों के साथ ही पर्यटक और वैज्ञानिक भी हैरान हैं।

धारचूला तहसील में 5,900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह पवित्र पर्वत अब बर्फ रहित है, जिससे एक काली, बंजर चोटी दिखाई दे रही है। दरअसल ‘ओम’ चिन्ह, एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटक आकर्षण है जो अब ग्लोबल वार्मिंग और उच्च हिमालयी क्षेत्र में निर्माण के कारण गायब हो रहा है। 16 अगस्त, 2024 को ओम पर्वत पर जाने वाली स्थानीय निवासी उर्मिला सनवाल गुंज्याल ने पहाड़ पर बर्फ की कमी पर निराशा व्यक्त की थी। 

उर्मिला ने अपने पोस्ट में लिखा था- “जब मैं तस्वीरें लेने के लिए नाभिडांग गई थी, तो ‘ओम’ चिन्ह गायब था। पहाड़ अब पूरी तरह से काला दिखाई देता है।”इस बदलाव के लिए ग्लोबल वार्मिंग, सड़क निर्माण और अत्यधिक पर्यटक यातायात को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में निर्माण हुआ है, जिसमें क्रशर और तारकोल की सड़कें शामिल हैं, जिससे तेजी से बर्फ पिघल रही है।

सितंबर 2016 में ओम पर्वत पर बर्फ थी, लेकिन इस साल यह बंजर है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को दर्शाता है। माउंट एवरेस्ट विजेता पर्वतारोही योगेश गर्ब्याल ने पहाड़ों, पर्यावरण, वनस्पति और ग्लेशियरों को बचाने के लिए सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा- “जलवायु परिवर्तन के प्रभाव हमारे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्पष्ट हैं। बढ़ती गर्मी और बदलते मौसम के पैटर्न के कारण बर्फबारी कम हो गई है, और प्रदूषण के कारण ब्लैक कार्बन के कारण बर्फ पिघलने में तेजी आई है।”

हाल के वर्षों में, राज्य ने दो महत्वपूर्ण ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) घटनाओं का अनुभव किया है, जिससे विनाशकारी प्रभाव पड़े हैं। जून 2013 में पहली घटना ने केदारनाथ घाटी में व्यापक विनाश किया, जिसके परिणामस्वरूप हज़ारों लोग मारे गए। दूसरी, फरवरी 2021 में, चमोली जिले में अचानक आई बाढ़ ने क्षेत्र की मुसीबतें और बढ़ा दीं। बता दें कि  स्कंद पुराण के मानस खंड में आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा को कैलाश मानसरोवर यात्रा जितना सार्थक माना जाता है। यही कारण है कि ओम पर्वत को छोटा कैलाश भी कहा जाता है।

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