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चंडीगढ़ में बुलाई गई हरियाणा की सर्वदलीय बैठक में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा को मिलने वाले पानी के संबंध में तथ्य रखे

चंडीगढ़ में बुलाई गई हरियाणा की सर्वदलीय बैठक में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा को मिलने वाले पानी के संबंध में तथ्य रखे। उन्होंने कहा कि हरियाणा कोई अतिरिक्त पानी नहीं मांग रहा बल्कि जो उसका हक उसकी मांग कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पंजाब हरियाणा के हक का पानी रोक कर बैठ गया है, जो कि सरासर गलत और असंवैधानिक है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 23 अप्रैल 2025 को BBMB की तकनीकी समिति ने हरियाणा को 8500 क्यूसिक पानी देने का निर्णय लिया, जिसे पंजाब सरकार ने लागू नहीं होने दिया। 30 अप्रैल को बीबीएमबी बोर्ड ने उसी निर्णय को फिर से पारित किया, लेकिन वह भी नजरअंदाज कर दिया गया।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा- “हरियाणा केवल पीने के पानी की मांग कर रहा है, खेती के लिए नहीं। लेकिन पंजाब का व्यवहार बड़े भाई जैसा नहीं, राजनीतिक विरोधी जैसा हो गया है।”

मुख्यमंत्री ने आंकड़ों के साथ दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में हरियाणा को औसतन 9000 क्यूसिक पानी मिलता रहा है। लेकिन इस वर्ष जानबूझकर गतिरोध पैदा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पंजाब सरकार पूरी तरह से राजनीतिक फायदे के लिए काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा- “जब तक दिल्ली में AAP की सरकार थी, तब तक कोई समस्या नहीं थी। लेकिन अब, दिल्ली की जनता से बदला लेने के लिए पंजाब सरकार ने हरियाणा को मिलने वाला पानी रोक दिया है।”

उन्होंने संसद द्वारा पारित भाखड़ा नांगल एक्ट 1959 और 1966 के पंजाब पुनर्गठन एक्ट का हवाला देते हुए बताया कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) एक निष्पक्ष और वैधानिक संस्था है, जिसका फैसला सभी राज्यों पर लागू होना चाहिए।

उन्होंने पंजाब के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि हरियाणा का पानी 31 मार्च को समाप्त हो गया था। उन्होंने कहा कि अप्रैल के लिए अतिरिक्त पानी BBMB की तकनीकी समिति द्वारा आवंटित किया गया था, जिसे पंजाब सरकार ने रोका — जो न केवल अनैतिक है, बल्कि संवैधानिक और कानूनी रूप से भी गलत है।

मुख्यमंत्री ने पंजाब सरकार पर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि पानी का स्तर हर साल बदलता है, पर BBMB की तकनीकी समिति ही इसका निर्धारण करती है।

उन्होंने बताया कि हरियाणा को उसकी कुल 12.55 MAF आवंटित पानी में से केवल 10.67 MAF ही मिल रहा है, जबकि पंजाब 14.67 MAF के बदले 17.15 MAF का उपयोग कर रहा है। यानि, पंजाब हरियाणा और राजस्थान दोनों के हिस्से का पानी ले रहा है।

मुख्यमंत्री ने सतलुज-यमुना लिंक नहर का मुद्दा भी उठाया और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद पंजाब द्वारा सहयोग न किए जाने को संघीय ढांचे पर हमला करार दिया। साथ ही उन्होंने भाखड़ा-नंगल डैम की चाबियों पर पंजाब पुलिस के कब्जे को गंभीर बताया।

श्री नायब सिंह सैनी ने जोर देकर कहा- “हरियाणा अपने अधिकारों के लिए हर मंच पर लड़ेगा। हम पंजाब सरकार से अपील करते हैं कि बीबीएमबी द्वारा तय किया गया पानी तुरंत हरियाणा को दिया जाए।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम यहां किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि भारत के जिम्मेदार नागरिक के तौर पर इकट्ठा हुए हैं। लेकिन, आज हमारे दिल में दर्द और आवाज में विनम्रता के साथ-साथ वह दृढ़ता भी है, जो हरियाणा के लाखों किसानों, माताओं-बहनों और बच्चों की पीड़ा को देखकर उपजती है।

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