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वायरल गर्ल मोनालिसा केस में बड़ा खुलासा! नाबालिग निकली, पति पर POCSO केस दर्ज

नई दिल्ली/खरगोन/केरल। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच में ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा भोंसले के मामले में बड़ा और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आयोग की विस्तृत जांच में यह पुष्टि हुई है कि मोनालिसा भोंसले नाबालिग है। इस खुलासे के बाद उससे विवाह करने वाले फरमान खान के खिलाफ मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर थाने में POCSO Act सहित अन्य गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है।आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में की गई जांच और अधिवक्ता प्रथम दुबे द्वारा की गई कानूनी पैरवी के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि मोनालिसा को बालिग बताकर विवाह कराया गया था, जबकि वह पारधी जनजाति समुदाय की नाबालिग लड़की है। अधिवक्ता प्रथम दुबे ने इस मामले को 17 मार्च 2026 को आयोग के समक्ष उठाया था।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि इस विवाह में CPI-M से जुड़े कुछ तत्वों की भूमिका और PFI जैसे संगठनों की संभावित संलिप्तता चिंता का विषय है। मामले को केवल निजी न मानते हुए इसे एक व्यापक सामाजिक और वैचारिक षड्यंत्र के रूप में भी प्रस्तुत किया गया।आयोग द्वारा गठित जांच दल ने केरल से लेकर मध्य प्रदेश के महेश्वर तक मात्र 72 घंटे के भीतर व्यापक जांच कर तथ्यों को जोड़ा। जांच की शुरुआत केरल स्थित एक मंदिर से की गई, जहां विवाह संपन्न हुआ था। मंदिर प्रशासन ने बताया कि विवाह आधार कार्ड में दर्ज आयु के आधार पर कराया गया। इसके बाद केरल के ग्राम पंचायत कार्यालय में विवाह का पंजीकरण किया गया, जिसमें मोनालिसा के कथित जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किया गया।जांच में पाया गया कि यह जन्म प्रमाण पत्र महेश्वर नगरपालिका द्वारा गलत जन्म तिथि के आधार पर जारी किया गया था। इसके पश्चात जांच दल ने मध्य प्रदेश के महेश्वर स्थित सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की, जिसमें मोनालिसा की वास्तविक जन्म तिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज पाई गई।इस आधार पर यह सिद्ध हुआ कि 11 मार्च 2026 को विवाह के समय मोनालिसा की आयु मात्र 16 वर्ष 2 माह 12 दिन थी, जो कि कानूनन नाबालिग है। इसके बाद आयोग के निर्देश पर गलत जन्म प्रमाण पत्र को निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।मामले में यह भी पुष्टि हुई कि पीड़िता पारधी जनजाति से संबंधित है, जो अनुसूचित जनजाति श्रेणी में आती है। इस आधार पर आरोपी के खिलाफ SC/ST Act के तहत भी प्रावधान लागू किए गए हैं। साथ ही Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) के तहत साजिश और अवैध विवाह से संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं।इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है और मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। आयोग ने 22 अप्रैल 2026 को केरल एवं मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को आयोग मुख्यालय, नई दिल्ली में तलब किया है और मामले की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नाबालिग के साथ हुए इस गंभीर अन्याय में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही केरल पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन की भूमिका की भी जांच की जा रही है।राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने आश्वस्त किया है कि इस मामले में न्याय सुनिश्चित होने तक वह लगातार निगरानी बनाए रखेगा और केंद्र सरकार को विस्तृत रिपोर्ट प्रेषित करेगा।

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