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रोहतक के इस गाँव की सीमाएं 24 घंटे के लिए सील: नहीं जलेगा किसी के घर चूल्हा

महम चौबीसी क्षेत्र के गांव खरक जाटान की सीमाएं 24 घंटे के लिए सील कर दी गई हैं। शनिवार को गांव का कोई भी व्यक्ति बाहर नहीं जा सकेगा और जो गांव से बाहर है उनके प्रवेश पर राेक रहेगी। यह प्रतिबंध ग्रामीणों के अलावा रिश्तेदारों सहित अन्य बाहरी व्यक्तियों, अधिकारियों पर भी लागू रहेगा।

गांव वालों की मान्यता है कि भादो माह के दूसरे या तीसरे शनिवार को यदि गांव की सीमाओं को सील कर आने जाने पर 24 घंटे के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाए तो पशुओं सहित गांव वालों में किसी भी तरह की बीमारी का प्रकोप नहीं फैलता। सरपंच प्रतिनिधि जग्गा व मास्टर विजय खत्री का कहना है कि शुक्रवार रात 12 बजे से शनिवार रात 12 बजे तक गांव की सीमाएं सील रहेंगी। इस दौरान न तो कोई गांव में प्रवेश कर सकेगा और न ही बाहर जा पाएगा।

महिलाएं करेंगी सत्संग, प्रसाद में मिलेगी खीर
शनिवार को गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जलेगा। न रोटियां सेकी जाएंगी और न चाय व अन्य खाने-पीने की चीजें पकेंगी। शनिवार को गांव के शिव मंदिर में खीर बनेगी, जिसे सुबह हवन के बाद ग्रामीण प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके अतिरिक्त घरों में शुक्रवार को जो खाना बनाया गया है उसे खाकर भी गांव वाले अपनी भूख मिटा सकते हैं। प्रतिबंध के दौरान शनिवार को महिलाएं सत्संग, गीत भजन करने के साथ अन्य पारंपरिक खेलों में भाग लेंगी। इसके अलावा, जोगियों की ओर से आलहा भजन सुनाया जाएगा। बीमारी से बचाव के लिए सभी पशुओं को ढाब का झाड़ा लगाया जाएगा।

सीमा पर रहेगा युवकों का पहरा
शुक्रवार रात 12 बजे से शनिवार रात 12 बजे तक गांव के चारों तरफ युवाओं का पहरा रहेगा। वे अपने स्तर पर आने जाने वालों को रोकेंगे। गांव वासी दयानन्द, विकास, शमशेर, राजेंद्र, विजय खत्री ने बताया कि शुक्रवार शाम गांव के चारों तरफ सीमा के रूप में पानी का छिड़काव कर एक रेखा खींच दी गई। इस रेखा को 24 घंटे तक कोई नहीं लांघ सकता। उन्होंने बताया कि प्रतिबंध लगाने से पहले ग्रामीण अपने सभी रिश्तेदारों को इसकी सूचना दे देते हैं, ताकि कोई शनिवार को गांव में न आ जाए। यदि कोई रिश्तेदार आता है तो उसे गांव से बाहर ही कहीं ठहराया जाता है। उन्होंने बताया कि यह उनके पूर्वजों की परंपरा है, जो कई साल से चलती आ रही है। ग्रामीण भादो माह के दूसरे या तीसरे शनिवार को लगने वाले इस प्रतिबंध को हर साल त्योहार की तरह मनाते हैं।

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