हरियाणा भाजपा की अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के ‘विशेष वर्ग’ वाले बयान ने प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया, जिसे अब उन्हें खुद ही स्पष्ट करना पड़ा है। पहले हुड्डा सरकार के दौरान ‘विशेष वर्ग’ को नौकरियां मिलने और पर्ची-खर्ची के आरोप लगाए गए, लेकिन बयान में इस वर्ग की पहचान स्पष्ट नहीं थी।
यही अस्पष्टता राजनीतिक विवाद का कारण बनी और इंटरनेट मीडिया पर जाट समुदाय के युवाओं तथा खिलाड़ियों ने प्रदेश अध्यक्ष से सवाल करना शुरू कर दिया कि आखिर ‘विशेष वर्ग’ से उनका आशय किससे है।
राजनीतिक तौर पर यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि हरियाणा में सरकारी नौकरियां केवल रोजगार का विषय नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श का बड़ा हिस्सा रही हैं।
हरियाणा भाजपा अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के विशेष वर्ग और खुंटी पर कुर्ते-पायजाम टंगवाने वाले बयान पर बवाल मच गया है। हिसार में खाप प्रतिनिधियों ने अर्चना गुप्ता के बयान की निंदा की। कंडेला खाप की महिला प्रधान सुदेश कंडेला अर्चना पर भड़क गईं।
उन्होंने कहा…
वो बोलणा सीख ले। उसे बोलण का बेरा ना। जिस विशेष जाति का नाम लिया है, उसका नाम बी बता दे। जल्दी उसे जवाब देंगे। भाजपा की सरकार एक जाति पै निशाना साध री।
वहीं, पूनिया खाप के प्रधान शमशेर पूनिया ने कहा, अर्चना गुप्ता के परिवार ने सदा ही हमारा शोषण किया है। सर छोटू राम ने अंग्रेजों के टाइम में इनकी ताखड़ी खूंटी पर टंगवा दी थी। हम जात-पात और धर्म के नाम पर लड़ने वाले लोग नहीं है। संविधान को मानते हैं। ये समाज में जहर घोलकर राज कर रहे हैं। उधर, जजपा नेता दिग्विजय चौटाला ने कहा कि यह रूढ़ीवादी मानसिकता के लोग हैं। अर्चना गुप्ता पढ़ी लिखी अनपढ़ हैं।
अर्चना गुप्ता ने पानीपत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, एक विशेष वर्ग सुबह-सुबह कलफ लगाकर कुर्ते-पायजामे पहनकर लघु सचिवालय में पहुंच जाते थे। अब उनस सबके कुर्ते पयजामे खुंटी पर टंगे हुए हैं।
पानीपत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंगलवार को डॉ. अर्चना गुप्ता ने कहा कि पिछली हुड्डा व इनेलो सरकारों में एक विशेष वर्ग सक्रिय था, जो सुबह-सुबह कलफ लगे कुर्ते-पायजामे पहनकर लघु सचिवालय पहुंच जाता था। ये लोग बिचौलियों, दलालों और ‘सेटिंग’ कराने का काम करते थे।
अर्चना गुप्ता ने कहा कि पूर्व सरकारों के दौरान सरकारी नौकरियों में भारी भ्रष्टाचार था। लोगों को नौकरी पाने के लिए अपनी जमीन, घर या मां के जेवर तक बेचने पड़ते थे या फिर केवल रिश्तेदारों और सिफारिश वालों को ही नौकरियां मिलती थीं।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि हमारी सरकार आने के बाद भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता लाई गई। बिचौलियों की दुकानदारी पूरी तरह बंद हो चुकी है और अब उनके कुर्ते-पजामे खूंटियों पर टंग गए हैं। किसी बिचौलिये या ‘विशेष वर्ग’ के हस्तक्षेप का सवाल ही नहीं उठता।
अर्चना गुप्ता ने बयान देने के बाद विवाद बढ़ता देख 11 अगस्त को स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि कहा कि विशेष वर्ग से उनका मतलब किसी जाति या समुदाय से नहीं था। उनका इशारा उन बिचौलियों और कथित दलालों की ओर था, जो पिछली सरकारों में सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर सचिवालय पहुंचते थे और व्यवस्था में प्रभाव रखते थे।
उन्होंने कहा कि चाहे हुड्डा सरकार रही हो या इनेलो की सरकार, ऐसे मध्यस्थों के माध्यम से सिस्टम बनाया जाता था और नौकरियां दिलाने के नाम पर लोगों से पैसा लिया जाता था। भाजपा अध्यक्ष ने दावा किया कि अब ऐसे लोगों का दौर समाप्त हो चुका है और उनका ‘कुर्ता-पायजामा खूंटी पर टंग चुका है’।
