एक सितंबर से नेशनल हाईवे-9 का सफर महंगा हो गया है। रोहतक से बहादुरगढ़ जाते समय रास्ते में आने वाले रोहद टोल पर 1 सितंबर की सुबह से टोल दरों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। टोल बढ़ने का सीधा सा असर बहादुरगढ़ और दिल्ली जाने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। टोल बढ़ने से रोडवेज बस के किराये में भी बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में निजी और सार्वजनिक वाहनों से सफर करने वाले यात्रियों की जेब पहले से ज्यादा हल्की होगी। दरअसल, प्रदेश में कुछ टोल पर दरें एक अप्रैल से बदलती हैं और कुछ की 1 सितंबर से। रोहद टोल पर यह बदलाव सितंबर से किया जाता है। डीघल टोल पर दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
टोल दरें बढ़ती हैं तो रोडवेज बस किराए में भी बढ़ोतरी हो जाती है। प्राइवेट ऑपरेटर भी रोडवेज की तर्ज पर किराया बढ़ा देते हैं। बहादुरगढ़ से रोहतक का बस किराया हर बार टोल दरों के साथ ही बढ़ जाता है। फिलहाल तो रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि टोल दरों में कितना बदलाव हुआ है उसके बाद ही किराया तय किया जाता है। फास्टैग को बढ़ावा देने के लिए लॉकडाउन से पहले ही सरकार द्वारा 24 घंटे में वापसी करने पर टोल में जो छूट मिलती थी, उसको भी कैश में खत्म कर दिया था। यानी एक तरफ की यात्रा का किराया 60 रुपए था।
दोनों तरफ का मिलाकर यह 120 रुपए होता था। यदि 24 घंटे के बाद वाहन की वापसी होती थी तो यह टोल 95 रुपए वसूला जाता था, लेकिन कैश में छूट पहले ही खत्म हो चुकी है। अब सिर्फ फास्टैग पर ही यह छूट है। इस बारे में रोहद टोल के संचालक ओमप्रकाश यादव का कहना है नए रेट की लिस्ट लगा दी है जिससे लोगों को नए रेट जानने में परेशानी नहीं हो।
हल्के वाहन सिंगल डबल मासिक पास
कार/जीप 85 125 2485
एलसीवी/मिनी बस 145 225 4350
ट्रक/बस 2 एक्सएल 290 435 8695
एमएवी 2 एक्सएल 465 700 13975
रोहतक के व्यापारियों ने सरकार से टोल टैक्स व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की है। इसके पीछे कारण बताते हैं कि टोल टैक्स के दाम बढ़ने पर यहां से निकल रहे व्यावसायिक वाहनों के संचालक उससे भी पांच फीसदी अधिक का टैक्स वसूल लेते हैं। कभी कोई बहाना तो कभी कोई बहाना। अब हर साल रेट बढ़ते जा रहे है। शहर के एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकार को उन सड़कों का भी निर्माण करना चाहिए जहां पर टोल टैक्स नहीं लेगे।
जो लोग बड़ी सड़क से सफर करना चाहे वे टोल दे जो लोग टोल नहीं देना चाहे तो वह छोटी सड़क से निकल सकें। लेकिन अकसर टोल कंपनियां आसपास की सभी छोटी सड़कों को जेसीबी आदि से इस हालत में पहुंचा देती हैं कि लोगों को मजबूरी में टोल देकर ही आगे का सफर पूरा करने को मजबूर होना पड़ता है।
