वृद्ध आश्रम में रह रहीं एक महिला की बीमारी से मौत हो गई, लेकिन उनकी मौत से भी ज्यादा दुखद दृश्य तब देखने को मिला, जब वृद्धाश्रम के लोगों ने परिजनों से संपर्क किया. उनके बड़े बेटे ने आश्रम से कहा कि मां का शव चार दिन डीप फ्रीजर में रख दें, क्योंकि घर में शादी है और शव आने से अपशगुन होगा. यह सुनकर आश्रम संचालक और वहां मौजूद लोग हैरान रह गए.
जौनपुर के वृद्ध आश्रम में गोरखपुर की रहने वाली शोभा देवी की बीमारी से मौत हो गई. मौत के बाद वृद्ध आश्रम के लोगों ने जब बेटे से गोरखपुर में संपर्क किया तो उसने कहा कि मां की लाश को चार दिन डीप फ्रीजर में रख दो, अभी घर में शादी है, बॉडी घर आई तो अपशगुन होगा. शादी के बाद मां के शव को ले जाऊंगा.
इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने वृद्धाश्रम संपर्क किया. किसी तरह शव गोरखपुर ले जाया गया. लेकिन शव को जलाने के बजाय परिजनों ने दफना दिया. शोभा देवी के पति ने बताया कि रिश्तेदार कह रहे हैं कि शव को चार दिन बाद मिट्टी से निकालकर अंतिम संस्कार करवा दिया जाएगा.दरअसल, गोरखपुर के रहने वाले भुआल गुप्ता किराना व्यापारी थे. वह अपनी पत्नी शोभा देवी के साथ केपीयर गंज के भरोईया गांव में तीन बेटों के साथ रहते थे. भुआल गुप्ता की तीन बेटियां भी है. उन्होंने अपने बेटे-बेटियों की शादी कर दी थी. 1 साल पहले पारिवारिक विवाद के बाद बड़े बेटे ने उन्हें घर से निकाल दिया था.
जानकारी के मुताबिक घर से निकल जाने के बाद भुआल अवसाद में सुसाइड करने के लिए राजघाट पहुंच गए थे. वहां मौजूद लोगों ने उन्हें समझाया बुझाया. बताया कि आप अयोध्या या मथुरा चले जाइए. वहां पर आपके रहने और खाने का इंतजाम हो जाएगा. भुआल अपनी पत्नी के साथ अयोध्या पहुंचे. अयोध्या में कोई भी इंतजाम न होने के बाद वह लोग मथुरा पहुंच गए.
मथुरा में लोगों ने उन्हें जौनपुर के वृद्ध आश्रम का पता बताया. वृद्धाश्रम चलाने वाले रवि कुमार चौबे ने बात कर उन दोनों को अपने यहां बुला लिया. एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में रवि ने बताया कि कुछ महीने पहले शोभा देवी के पैर में दिक्कत आ गई थी. इलाज के लिए उन्हें प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया जहां से उनकी दवा चल रही थी.
मृतका शोभा देवी और उनके पति भुआल गुप्ता (फाइल फोटो)
19 नवंबर को शोभा देवी की तबीयत खराब हो गई. इलाज के दौरान शोभा देवी की मौत हो गई. भुआल ने यह जानकारी अपने छोटे बेटे को फोन करके बताई. छोटे बेटे ने कहा कि वह अपने बड़े भाई से पूछ कर बताते हैं. कुछ देर बाद छोटे बेटे ने भुआल को फोन किया. उसने कहा कि बड़े भाई कह रहे हैं कि उनके बेटे की शादी है, शव को चार दिन डीप फ्रीजर में रख दिया जाए. डेड बॉडी अभी घर आई तो अपशगुन होगा. चार दिन बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा.
इसके बाद वृद्ध आश्रम के हेड रवि चौबे ने बेटे से बातचीत की. बेटे ने यही बात रवि चौबे से भी दोहराई. परिवार के अन्य सदस्यों को जब मौत की जानकारी हुई तो उन्होंने कहा कि आखिरी बार मां के चेहरे का दर्शन करना चाहते हैं. किसी तरह शव को जौनपुर से गोरखपुर भेजा गया. लेकिन वहां पर बड़े बेटे ने अंतिम संस्कार करने के बजाय शव को दफना दिया. पिता भुआल से कहा गया कि चार दिन बाद शव निकालकर अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा. पिता का कहना है कि चार दिन में शव कीड़े खा जाएंगे.
रवि चौबे ने जानकारी देते हुए बताया कि माता-पिता की बात छोटे बेटे से ही होती थी. कभी-कभी हाल चाल लेने के लिए फोन आता था. परिवार के सदस्य कभी मुलाकात करने के लिए माता-पिता से नहीं आते थे. मौत के बाद जिस तरह का व्यवहार सामने आया, उसने सभी को दुखी और हैरान कर दिया. यह घटना बुजुर्गों के प्रति बदलते सामाजिक व्यवहार का कड़वा सच सामने लाती है, जहां माता-पिता ने जिन बच्चों को पाला, वही उनके आखिरी समय में दायित्व निभाने से पीछे हट गए. भुआल गुप्ता का दर्द यह है कि अपने ही बच्चों की ओर से माता-पिता की ऐसी उपेक्षा किसी भी परिवार का दिल दहला सकती है.

