1916 की बात है काशी जो की अब वाराणसी के नाम से जाना जाता है उस समय बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय | Banaras Hindu University (BHU) के शिलान्यास के दौरान दिल्ली से वायसराय गये थे जिनमे गांधीजी को भी बुलाया गया और कार्यक्रम के दौरान महात्मा गाँधी की ने भारतीयों के सामने अपना पहला भाषण दिया.

वो भी अंग्रेजी में, जब महात्मा गाँधी ने भाषण की शुरुआत किया तो उनका पहला शब्द था बड़े शर्म की बात है अपने ही देश में अपने लोगो के सामने मुझे हिंदी न बोलकर अंग्रेजी में बोलना पड़ रहा है ऐसा बोलना वहा मौजूद अंग्रेजो के गुस्से के आग में घी डालने के बराबर था लेकिन महात्मा गाँधी बिना किसी से डरे अपने विचारो को स्वतंत्र रूप से बोलते रहे और उनका भाषण सबका सुनना था की बस लोगो के दिलो में अंग्रेजो के प्रति गुस्सा फूट पड़ा था जो आ

MAHATMA GANDHI’s UNTOLD STORIES IN HINDI – 1

महात्मा गाँधी | Mahatma Gandhi जब बचपन में अपने पढाई में बहुत ही कमजोर थे लेकिन उन्हें पुस्तके पढने का बहुत ही शौक था जब भी महात्मा गाँधी को कोई अच्छी पुस्तक मिलती तो उसे खूब मन लगाकर पढ़ते थे एक बार महात्मा गाँधी को एक ऐसा पुस्तक मिला जिसमे श्रवण कुमार और उनके माता पिता के सेवा की कहानी थी किस प्रकार श्रवण अपने प्राणों की आहुति देकर भी अपने माता पिता की सेवा करते है जिसे पढकर महात्मा गाँधी बहुत ही प्रभावित हुए और उन्होंने निश्चय किया की वे भी श्रवण कुमार की तरह अपने माता पिता की सेवा करेगे. और जब उन्हें अपने पड़ोस में हरिचन्द्र के जीवन पर आधारित नाटक को देखने का मौका मिला हरिश्चन्द्र के नाटक को देखकर महात्मा गाँधी | Mahatma Gandhi के आखो में आशु आ गये और उन्होंने जीवन भर सत्य की राह पर चलने की कसम खायी चाहे इसके लिए उन्हें कितना भी कष्ट क्यू न उठाने पड़े और महात्मा गाँधी ने आजीवन सत्य के राह पर चले.

MAHATMA GANDHI’s UNTOLD STORIES IN HINDI – 2

अन्य बालको की तरह महात्मा गाँधी भी बचपन में बहुत ही डरपोक स्वाभाव के थे रात के अँधेरे में अपने घर में जाने से डरते थे और अगर उन्हें भूत प्रेत की कहानिया सुना दिया जाता था तब गांधीजी बहुत ही भयभीत हो जाते थे ऐसा सब देखकर उनके घर में काम करने वाली नौकरीं रम्भा ने समझाया की जब भी तुम्हे डर लगे राम का नाम लेना सब डर भाग जायेगा इस तरह गांधीजी बचपन से अपने जबान पर राम का नाम रटने लगे और अपने डर को दूर किया और राम के नाम से इतना प्रेम हो गया था की अपने मरने के आखिरी क्षण में भी उनका आखिरी शब्द राम ही था.

MAHATMA GANDHI UNTOLD STORIES IN HINDI – 3

एक बार गाँधीजी के स्कूल में निरिक्षण करने बड़े अधिकारी आये और फिर उकने क्लास के लडको को कुछ अंग्रेजी के शब्द लिखने को दिए सबने सही लिखा लेकिन Gandhiji ने एक शब्द गलत लिख दिया था उनके अध्यापक ने इशारे से उस शब्द को सही करने को कहा लेकिन महात्मा गाँधी तो मन के सच्चे थे सभी लडको के सभी शब्द सही निकले लेकिन महात्मा गाँधी का एक शब्द गलत लिखा हुआ था.

फिर बाद में जब उनके अध्यापक ने ऐसा जब करने को बताया था फिर भी नही किया तो गांधीजी ने बोला जब मै गलत लिख ही दिया तो किसी के बताने से वो कैसे सही हो सकता है जब तक वो मुझे खुद सही न करने आये और अगर मै आपके बताने पर लिख भी देता तो मै निरीक्षक के सामने खुद को झूठा बना लेता इसलिए ऐसा करने को मेरा मन न हुआ शायद इसी तरह महात्मा गाँधी के मन में सत्य का विचार था जो लोगो के लिए प्रेरणा बन जाती है.

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एक बार अपने बुरे दोस्त की कुसंगति में आने पर महात्मा गाँधी बीडी की लत गयी और उस लड़के के कहने पर महात्मा गाँधी चोरी छिपे मांस भी खाने लगे क्यूकी महात्मा गाँधी के घर पर सभी शाकाहारी थे और इस तरह अपने गलत आदत के कारण उन्हें चोरी करने की भी आदत पद गयी क्यूकी इन सबके लिए पैसो की आवश्कयता पड़ती थी और फिर महात्मा गाँधी ने धीरे धीरे कर्ज भी लेना शुरू कर दिया था लेकिन अपने इस कर्ज को चुकाने के लिए अपने बड़े भाई के सोने के कड़े में एक टुकड़ा चुराकर बेच दिया और और अपना कर्जा तो चूका दिया.

लेकिन महात्मा गाँधी का मन खुद को इस अपराध के लिए मान नही रहा था और अपने गलतियों को अपने पिता के सामने पत्र के माध्यम से बता दिया यह सब पढकर उनके पिताजी कुछ भी बोल न सके और महात्मा गाँधी द्वारा लिखा गया पत्र फाडकर फेक दिया यह सब देखकर महात्मा गाँधी फूटफूटकर रोने लगे और प्रण लिया की आज के बाद वे सारे बुरे काम छोड़ देंगे और इस प्रकार महात्मा गाँधी जो भी शपथ लेते उसपर हमेसा अडिग रहते थे.

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महात्मा गाँधी जब अपनी पढाई पूरी कर लिया तो उन्हें वकालत करने के लिए दक्षिण अफ्रीका | South Africa जाने का मौका मिला दक्षिण अफ्रीका में गोरे अंग्रेज भारतीयों को कुली कहकर पुकारते थे और भारतीयों के साथ वहा बहुत बुरा बर्ताव करते थे जिसका सामना गांधीजी को भी करना पड़ा था जब वे एक दिन रेलगाड़ी के फर्स्ट क्लास डिब्बे में बैठकर जा रहे थे तो उस डिब्बे में कुछ अंग्रेज प्रवेश किये. और उसने शिकायत किया की इस कुली को दुसरे डिब्बे में बैठाया जाय लेकिन गांधीजी ने अपने इस डिब्बे की टिकट दिखाया तो भी उस रेल के कर्मचारी नही माने और महात्मा गाँधी के सामान को बाहर उठाकर फेक दिया और गांधीजी को धक्के मारकर बहार कर दिया गया जिसे देखकर महात्मा गाँधी का जीवन ही बदल गया और उन्होंने प्रण लिया ली अंग्रेजो के अत्याचार को और नही सहेगे और फिर यही से उन्होंने सत्याग्रह आन्दोलन की शुरुआत की.

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