आज करवाचौथ के दिन जब हर पत्नी अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रख रही थी,
उसी समय एक पत्नी की आवाज़ में बेबसी थी —
उसके पति, जिनकी उम्र मात्र 42 वर्ष है, जो झज्जर के अस्पताल में ब्रेन हेमरेज होने की वजह से एडमिट है जिनको रेयर ब्लड A Negative SDP की तत्काल आवश्यकता थी।
समय कम था, स्थिति गंभीर थी…
पहली बार रक्तदान करने के लिए अशोक मालिक जी को प्लेटलेट डोनेशन के लिए मोटीवेट किया
और कुछ ही समय में रोहतक में SDP ब्लड की व्यवस्था कर,
उस परिवार में उम्मीद की लौ जला दी ?
आज लगा —
व्रत तभी सार्थक होता है जब उसमें किसी और की सांस बसती है।
करवाचौथ सिर्फ चाँद देखने का नहीं,
किसी के जीवन में उजाला भरने का दिन भी है।
हमारा करवाचौथ आज सच्चे मायनों में पूरा हुआ —
जब किसी की सांसें लौट आईं,
जब किसी माँ ने राहत की सांस ली,
जब एक परिवार फिर से मुस्कुराया।
? भगवान उस मरीज को शीघ्र स्वस्थ करे।
और हम सब ये प्रण लें —
जहाँ ज़रूरत होगी, वहाँ मानवता का रक्त जरूर बहेगा।
क्योंकि —
❤️ रक्तदान ही सच्चा महादान है,
जो इंसानियत को ज़िंदा रखता है। ❤️
हम और आप सोशल वेलफेयर सोसाइटी रक्तसेवा में तत्पर
करवाचौथ का सच्चा व्रत — किसी की सांसों को बचाना,रक्तसेवा में संस्था के सदस्य विकास मिश्रा के पास फोन आता है

