हरियाणा के पूर्व कांग्रेस विधायक धर्म सिंह छौक्कर की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनके घर खरीदारों को पैसा लौटाने के प्रस्ताव पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को मामले में 13 जुलाई तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि छौक्कर और उनके बेटों की घोषित संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 36 करोड़ रुपए है, जबकि वे घर खरीदारों को भुगतान के लिए 90 करोड़ रुपए जमा कराने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि इतनी बड़ी राशि का इंतजाम कहां से किया जाएगा।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि छौक्कर का प्रस्ताव इस शर्त पर आधारित है कि परियोजना से जुड़ी जब्त संपत्तियों को पहले मुक्त किया जाए। कोर्ट ने कहा कि यह किसी स्वतंत्र स्रोत से भुगतान की योजना नहीं लगती, बल्कि कथित अपराध की आय से ही परियोजना पूरी करने का प्रयास प्रतीत होता है।
क्या है मामला?
छौक्कर और उनके परिवार से जुड़ी महिरा ग्रुप की कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने गुरुग्राम की किफायती आवासीय परियोजनाओं महिरा होम्स-68, महिरा होम्स-103 और महिरा होम्स-104 में हजारों घर खरीदारों से करोड़ों रुपए वसूले, लेकिन उन्हें फ्लैट नहीं दिए।
ED का आरोप है कि खरीदारों से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल निर्माण कार्य के बजाय अन्य उद्देश्यों में किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार इस मामले में करीब 616 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग हुई और इसी रकम से कई संपत्तियां खरीदी गईं।
जमानत के लिए दिया यह प्रस्ताव
18 जून को दाखिल हलफनामे में छौक्कर ने दावा किया कि महिरा होम्स-68 और 103 परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा कर दिया जाएगा। वहीं महिरा होम्स-104 के खरीदारों को भुगतान के लिए 90 करोड़ रुपए जमा कराने की भी पेशकश की गई है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना की व्यवहारिकता और धन के स्रोत को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
हाईकोर्ट भी खारिज कर चुका जमानत
इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट अप्रैल 2026 में छौक्कर की नियमित जमानत याचिका खारिज कर चुका है। हाईकोर्ट ने कहा था कि मामले में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और जांच में पर्याप्त सामग्री सामने आई है। साथ ही आरोपी के फरार होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

