रोहतक की सुनारिया जेल में रेप और हत्या के मामले में बंद राम रहीम को 6 बार पैरोल व फरलो देने वाले पूर्व जेलर को BJP ने टिकट दी है। BJP ने दादरी से दंगल गर्ल बबीता फोगाट का टिकट काटकर सुनील सांगवान को मैदान में उतारा है। सुनील सांगवान जेल सुपरिटेंडेंट के पद से वीआरएस लेकर इसी हफ्ते भाजपा में शामिल हुए थे।
टिकट मिलने के बाद सुनील सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहे हैं। सुनील सांगवान पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान के बेटे हैं। सतपाल सांगवान लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। सतपाल चरखी दादरी से पूर्व विधायक हैं।
सुनील सांगवान 5 साल सुनारिया में तैनात रहे
सुनील सांगवान ने 22 साल से ज्यादा समय तक सेवाएं दी हैं। वह 2002 में हरियाणा जेल विभाग में शामिल हुए थे। कई जेलों के अधीक्षक रहे। जिनमें रोहतक की सुनारिया जेल भी शामिल है, जहां उन्होंने 5 साल तक अपनी सेवाएं दीं। यह वही जेल है, जहां राम रहीम सिंह साध्वियों से यौन शोषण और पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में सजा काट रहा है। 12 अगस्त को राम रहीम सुनारिया जेल से 21 दिन की फरलो पर जेल से बाहर आया था। गुरुवार को राम रहीम की फरलो का समय पूरा हो गया और वह दोबारा जेल में चला गया है।
राम रहीम को 10 बार पैरोल या फरलो मिली। इनमें 6 बार पैरोल या फरलो सांगवान के कार्यकाल में मिली।बता दें कि हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थायी रिहाई) अधिनियम जेल अधीक्षक को कैदियों को पैरोल या फरलो देने के लिए मामलों की सिफारिश जिला मजिस्ट्रेट से करने का अधिकार देता है। इसी अधिकार के तहत सुनील सांगवान ने 6 बार राम रहीम की सिफारिश की।
राजनीति में आने से पहले सुनील सांगवान हरियाणा की गुरुग्राम भोंडसी जेल के अधीक्षक थे। जिससे उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) का आवेदन बीते रविवार (1 सितंबर) को सरकार को दिया था। उनके आवेदन को स्वीकार करने की प्रक्रिया में इस कदर तेजी लाई गई कि जेल महानिदेशक (डीजी) ने रविवार को राज्य के सभी जेल अधीक्षकों को एक ईमेल भेजा, जिसमें उन्हें उसी दिन ‘नो-ड्यू’ प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया गया।डीजी के पत्र में कहा गया, ‘गुरुग्राम जिला जेल के अधीक्षक सुनील सांगवान ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए अनुरोध किया है, इसलिए अनुरोध है कि उनको नो-ड्यू प्रमाणपत्र जारी किया जाए’
सुनील सांगवान के पिता सतपाल सांगवान भी 1996 में राजनीति में आने से पहले BSNL में सब डिवीजनल अधिकारी (SDO) थे। बाद में वह पद से इस्तीफा देकर राजनीति में आए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी (हविपा) के उम्मीदवार के तौर पर चरखी दादरी सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, बाद में उन्होंने और भी चुनाव लड़े।2009 में वह हरियाणा जनहित कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीते और भूपिंदर हुड्डा सरकार में मंत्री भी बने। 2014 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। 2019 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो उन्होंने जननायक जनता पार्टी (जजपा) का दामन थाम लिया और चुनाव लड़ा, लेकिन फिर हार मिली।

