लद्दाख को राज्य का दर्जा दिए जाने और उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर 21 दिनों से धरने पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है. हालांकि 21 दिनों तक नमक और पानी पर जीवित रहने के बाद, प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने कहा कि उनकी लड़ाई जारी रहेगी.

इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लोगों से किए वादे पूरा करने की अपील की. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किए एक वीडियो में कमजोर दिख रहे वांगचुक ने लद्दाख के लोगों से राष्ट्र हित में इस बार ‘सावधानीपूर्वक’ अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का आह्वान किया.

सोनम वांगचुक लेह में स्थित एपेक्स बॉडी और करगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) के संयुक्त प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के एक दिन बाद छह मार्च से शून्य से नीचे के तापमान पर ‘जलवायु अनशन’ कर रहे हैं. ये दोनों संगठन लद्दाख को राज्य का दर्जा देने तथा उसे छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन का संयुक्त रूप से नेतृत्व कर रहे हैं.

छठी अनुसूची में स्वायत्त जिला परिषदों के जरिए असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में आदिवासी इलाकों के प्रशासन से जुड़े प्रावधान हैं.

सोनम वांगचुक ने कहा, ‘‘भारत लोकतंत्र की जननी है और हम नागरिकों के पास एक बहुत विशेष शक्ति है. हम निर्णायक भूमिका में हैं, हम किसी भी सरकार को उसके तौर तरीके बदलने के लिए विवश कर सकते हैं या काम नहीं करने पर सरकार बदल सकते हैं.” दावा है कि पिछले 21 दिनों में लद्दाख के तीन लाख निवासियों में से करीब 60,000 लोग इस अनशन में शामिल हुए हैं.

लद्दाख में पांचवें चरण में 20 मई को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होगा.!

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