शिमला, 7 नवंबर। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से बिजली में हिस्सेदारी को लेकर हिमाचल प्रदेश की करीब तीन दशक पुरानी कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिलने का दावा किया गया है। हिमाचल के एडवोकेट जनरल अनूप रत्न के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देने का आदेश दिया है। यह बिजली अगले 20 वर्षों में एरियर के रूप में दी जाएगी।
अनूप रत्न ने बताया कि इस फैसले से हिमाचल को हर साल औसतन करीब 600 मिलियन यूनिट बिजली मिलने का अनुमान है। उनके अनुसार, इससे प्रदेश को सालाना 600 से 800 करोड़ रुपये तक का आर्थिक लाभ हो सकता है। बिजली की कीमतों के आधार पर आने वाले 20 वर्षों में यह लाभ करीब 15 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
1996 में शुरू हुई थी कानूनी लड़ाई
एडवोकेट जनरल अनूप रत्न ने बताया कि हिमाचल प्रदेश ने वर्ष 1996 में इस मामले में सिविल सूट दायर किया था। वर्ष 2011 से 2022 के बीच कई बार सुनवाई हुई, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं हो पाया। वर्ष 2023 के बाद मामले की विस्तृत सुनवाई हुई।
उनके अनुसार, केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल ने भी सुप्रीम कोर्ट में नोट प्रस्तुत कर हिमाचल को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देने की सिफारिश की थी। इसमें 60 प्रतिशत हिस्सेदारी पंजाब और 40 प्रतिशत हरियाणा से संबंधित थी। हरियाणा ने बाद में इस प्रस्ताव पर सहमति जता दी, जबकि पंजाब ने इसका विरोध जारी रखा।
पंजाब ने निर्माण खर्च का दिया था तर्क
अनूप रत्न के मुताबिक, पंजाब का तर्क था कि भाखड़ा बांध के निर्माण में उसने खर्च किया था, इसलिए उस खर्च की कटौती के बाद हिमाचल को बिजली का हिस्सा नहीं मिलना चाहिए।
हिमाचल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि बांध निर्माण के लिए पंजाब को केंद्र सरकार ने ऋण दिया था, जिसे वापस नहीं किया गया। उस समय हिमाचल केंद्र शासित प्रदेश और पार्ट-सी स्टेट था। ऐसे में परियोजना के वित्तीय बोझ में हिमाचल का भी हिस्सा जुड़ा था।
किशाऊ बांध परियोजना को लेकर हरियाणा से बनी सहमति
एडवोकेट जनरल ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हरियाणा सरकार के साथ बातचीत के दौरान किशाऊ बांध परियोजना को लेकर भी एक शर्त रखी थी। इसके तहत हिमाचल किशाऊ बांध के निर्माण में पावर कंपोनेंट का खर्च नहीं उठाएगा और BBMB मामले में हरियाणा केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल के प्रस्ताव का समर्थन करेगा।
उनके अनुसार, करीब छह महीने तक चली बातचीत के बाद हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस प्रस्ताव पर सहमति जताने के लिए तैयार हुई। अनूप रत्न ने कहा कि हरियाणा का यह बयान सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी दर्ज है।
नकद के बजाय बिजली लेने का फैसला
अनूप रत्न के अनुसार, पहले हिमाचल को बिजली की हिस्सेदारी के बदले नकद भुगतान मिलने की चर्चा थी। उस समय बिजली की कीमत करीब 3.85 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से आंकी गई थी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नकद राशि के बजाय वास्तविक बिजली लेने का निर्णय किया। सरकार का मानना था कि आने वाले वर्षों में बिजली की कीमत बढ़ने से प्रदेश को अधिक आर्थिक लाभ मिलेगा।
एडवोकेट जनरल ने बताया कि अक्टूबर से मार्च के बीच मिलने वाली बिजली को प्रदेश बेहतर दरों पर बेच सकता है। औसतन 10 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से मूल्यांकन करने पर सालाना 600 से 800 करोड़ रुपये तक का लाभ होने का अनुमान है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लागू होने की उम्मीद
अनूप रत्न ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद BBMB को पंजाब और हरियाणा के हिस्से से बिजली का समायोजन कर हिमाचल को देना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि बोर्ड जल्द आदेश लागू करेगा।
उन्होंने इस फैसले को हिमाचल के अधिकारों की करीब तीन दशक पुरानी लड़ाई का महत्वपूर्ण परिणाम बताया और इसे प्रदेश के लिए दिवाली का तोहफा करार दिया।
वाइल्ड फ्लावर हॉल और अन्य मामलों का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने BBMB के फैसले को प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई में सरकार की चौथी बड़ी जीत बताया। उन्होंने इससे पहले वाइल्ड फ्लावर हॉल, जेएसडब्ल्यू और किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े मामलों का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ये कानूनी लड़ाइयां किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए लड़ी हैं।
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री सुक्खू ने BBMB मामले को लेकर भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई पहले प्रभावी तरीके से क्यों नहीं लड़ी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने प्रदेश के हितों को नजरअंदाज किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार हिमाचल के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
