हरियाणा के नारनौल में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला 6 साल का छात्र गुरुवार को कक्षा में बंद रह गया। छुट्टी होने पर स्कूल स्टाफ कमरों और गेट का ताला लगाकर अपने घर चला गया। किसी की भी नजर छात्र पर नहीं पड़ी।
जब छात्र की आंख खुली तो अंधेरे कमरे में खुद को बंद देख वह रोने लगा। दो घंटे तक छात्र चिल्लाते हुए रोता रहा। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक ग्रामीण ने बंद स्कूल से रोने और चिल्लाने की आवाज सुनी तो वह दीवार फांदकर स्कूल में पहुंचा और छात्र को कमरे में बंद पाया। उसने बच्चे को चुप कराते हुए खिड़की पर बुलाया और पानी दिया।
उधर, इसकी सूचना पर पहुंचे सरपंच और पुलिस ने स्कूल स्टाफ को बुलाकर गेट खुलवाया और छात्र को बाहर निकाला। इसके बाद मौके पर पहुंचे उसके परिजनों को सौंपा गया। इस घटना से छात्र काफी सहम गया था। परिजनों ने स्कूल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया।
शुक्रवार को इस मामले में स्कूल में पंचायत बुलाई गई। इसमें स्कूल स्टाफ ने ग्रामीणों से माफी मांगी और भविष्य में ऐसी गलती न होने देने का वादा भी किया। बच्चे के माता-पिता यूपी के रहने वाले हैं और नारनौल में रहकर मजदूरी करते हैं।
उधर, इस बारे में सरपंच रुबी के पति प्रीतम से बात की गई। उन्होंने बताया कि यह कोई ज्यादा बड़ी बात नहीं थी। कुछ ही देर में बच्चे की आवाज सुनाई दे गई थी। इसके बाद बच्चे को स्कूल से निकाल दिया गया था। आज स्वतंत्रता दिवस समारोह कार्यक्रम के बाद हेड मास्टर और अन्य स्टाफ को इस बारे में चेतावनी दे दी गई है। स्टाफ ने भी अपनी गलती मानी है।
राजकीय प्राइमरी स्कूल नूनी कलां के हेड मास्टर सोमदत्त ने बताया कि बच्चे को नींद आ गई थी। इसलिए वह कुछ देर के लिए स्कूल में बंद रह गया। सूचना मिलते ही बच्चे को स्कूल से निकाल दिया गया था। बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है, उसे कुछ भी नहीं हुआ। आज चपरासी रोशनी देवी ने ग्रामीणों से इसके लिए माफी भी मांग ली है।

