रोहतक स्थित PGI के MBBS स्टूडेंट ने सरकार की बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में प्रदर्शन किया। सरकार द्वारा लागू की गई पॉलिसी के तहत MBBS स्टूडेंट को प्रतिवर्ष 9.20 लाख रुपए जमा करवाने होंगे। वहीं, 80 हजार रुपए फीस। जिस लिहाज से सभी भावी डॉक्टरों को प्रति वर्ष 10 लाख रुपए जमा करवाने पड़ रहे हैं।

नई पॉलिसी आने के कारण सभी MBBS स्टेडेंट्स को 4 साल में कुल 40 लाख रुपए जमा करवाने होंगे। इसके विरोध में मंगलवार को PGI के MBBS स्टूडेंट ने डीन कार्यालय से लेकर मेडिकल चौक तक विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही चेतावनी भी दी की जल्द से जल्द सरकार अपने आदेश को वापस ले। मांग पूरी नहीं होने तक विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।

विरोध प्रदर्शन के बीच MBBS के विद्यार्थियों ने मानवता का भी परिचय दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान मेडिकल मोड पर जाम की स्थिति पैदा हो गई। जाम में एक एंबुलेंस भी फंस गई। एंबुलेंस को फंसा देखकर MBBS स्टूडेंट ने विरोध प्रदर्शन को बीच में रोककर एंबुलेंस को रास्ता दिया और आगे जाने दिया।

PGI रोहतक से MBBS द्वितीय वर्ष के छात्र अक्षत मित्तल ने कहा कि प्रदर्शन बांड पॉलिसी के विरोध में किया गया। इस पॉलिसी के लागू करने से सबसे पहले उनका बैच प्रभावित हुआ। सरकार दाखिले से पहले 40 लाख रुपए मांग रही है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में मध्यम वर्ग के विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं जो ज्यादा पैसे नहीं दे सकते। दाखिले के लिए विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत की है, लेकिन इस पॉलिसी के लागू होने से विद्यार्थियों के सामने अपने परिवार वालों के समक्ष मुंह ना दिखा पाने तक की नौबत आ गई है।

MBBS विद्यार्थियों ने कहा कि सरकार जनता से भी उनका अच्छे डॉक्टर से इलाज करवाने का इक छीन रही है। एक पैसे के बल पर तैयार डॉक्टर अच्छा होगा या मेरिट के आधार पर तैयार किया हुआ। मेरिट वालों के सामने फीस का पहाड़ खड़ा कर दिया है, जिस कारण वे दाखिले से वंचित रह रहे हैं।

विद्यार्थियों ने कहा कि उनके बैच में 250 सीटें हैं और अन्य कॉलेजों की बात करें तो 720 सरकारी सीटें हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए फीस इतनी बढ़ाई जा रही है कि यहां के बच्चे दूसरे प्रदेशों में जा रहे हैं। ऑल इंडिया कोटा में रोहतक PGI में 37 सीटें हैं, जिनमें से केवल 3 सीटों पर दाखिला हुआ है। जबकि नई पॉलिसी लागू होने से पहले दाखिला लेने वालों की भरमार थी।

विद्यार्थियों ने कहा कि दूसरे प्रदेशों में फीस काफी कम है। उत्तर प्रदेश में 20-30 हजार और एम्स में 5-10 हजार है। अधिक से अधिक 50-80 हजार तक है। लेकिन सरकार ने शब्दों में जाल में फंसाकर सर्विस बांड के नाम पर 9.20 लाख रुपए और 80 हजार प्रतिवर्ष फीस मांगी है। जिससे प्रतिवर्ष 10 लाख रुपए देने होंगे। जबकि दूसरे प्रदेशों में जब कोई विद्यार्थी पढ़ाई के बाद सरकारी सेवा नहीं करता तो उसे सर्विस बॉन्ड देना पड़ता है, जबकि यहां पहले ही बॉन्ड ले रहे हैं।

PGI रोहतक से MBBS द्वितीय वर्ष की छात्रा प्रिया कौशिक ने कहा कि जो बच्चा 4-5 साल की मेहनत से तैयारी करके यहां तक पहुंचने वाले बच्चे को केवल पैसे के बल पर दाखिला दिया जा रहा है। जिसके कारण रैंकिंग भी गिर रही है। आज दाखिले से पहले बाँड़ा का नाम आता है।

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