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दिल्ली की सड़कों पर अब नहीं दिखेंगे आवारा कुत्ते, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद वकीलों से भिड़े डॉग लवर्स, जमकर हुई हाथापाई

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजे जाने का सख्त आदेश दिया है. आठ हफ्तों के अंदर सड़कों पर घूम रहे लावारिस कुत्तों को पकड़ कर डॉग शेल्टर में भेजने का आदेश जब से दिया है तब से डॉग लवर्स में गुस्सा साफ तौर पर नजर आ रहा है. सोमवार रात इंडिया गेट पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया. आपको बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय ने यह साफ किया कि अगर किसी भी व्यक्ति को या किसी भी संस्था ने इस काम में बाधा डाली, तो उसके विरुद्ध एक्शन लिया जाएगा और एफआईआर दर्ज करने तक के निर्देश दिए जा चुके हैं. दिल्ली में रोहिणी के पास पूठ कलां में आवारा कुत्ते के काटने से रेबीज के कारण 6 साल की बच्ची की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर फैसला सुनाया हैI

सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के बाद जिसके बाद डॉग लवर्स में काफी गुस्सा है. 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में जब इस मामले पर सुनवाई चल रही थी उस दौरान बाहर खड़े डॉग लवर्स और वहां मौजूद वकीलों से भिड़त (Dog Lovers And Lawyers Clash) हो गई. देखते ही देखते उनकी कहासुनी हाथापाई में बदल गई. इस घटना को वहां मौजूद लोगों ने अपने कैमरे में कैद कर लिया. इसका एक वीडियो सामने आया है. जिसमें वकील और कुछ लोग आपस में कॉलर पकड़कर एक दूसरे के साथ मारपीट करते देखे जा सकते हैं.

हालांकि वहां मौजूद लोगों ने बीच बचाव करने की भी कोशिश की. इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट के बाहर खड़े डॉग लवर्स काफी चीखते-चिल्लाते और वकीलों को गालियां देते नजर आ रहे हैं. वीडियो को देखकर ऐसा लग रहा है कि अदालत की सुनवाई का गुस्सा वह वकीलों पर उतार रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के बाहर का यह वीडियो हैरान कर देने वाला है. जब आम लोग वकीलों से ही भिड़ गए और उनको गालियां देने लगे.

आंकड़ों पर नजर डाले तो इस साल अब तक दिल्ली में कुत्तों के काटने के कुल 26,334 मामले सामने आए हैं. पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के मुताबिक दिल्ली में तीन लाख कुत्ते हैं, जबकि एक भी शेल्टर होम नहीं है.

आवारा कुत्तों को लेकर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नेताओं से लेकर फिल्मी सितारों और आम लोग तक खूब नाराजगी जता रहे हैं. उनका कहना है कि अदालत का यह फैसला चिंताजनक है. कई लोग तो इसे अमानवीय तक बता रहे हैं.

पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का कहना है कि अदालत का ये फैसला आर्थिक रूप से अव्यावहारिक और क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन के लिए संभावित रूप से हानिकारक करार है. उनका कहना है कि दिल्ली में 3 लाख आवारा कुत्ते हैं. उन सभी को पकड़कर अर शेल्टर होम भिजवाया जाएगा तो सरकार को 1 या 2 हजार शेल्टर होम बनाने होंगे. सबसे पहले तो उसके लिए जमीन तलाशनी होगी. इस पर 4-5 करोड़ के करीब का खर्च आएगा. हर सेंटर में केयरटेकर, खाना बनाने वाले और खिलाने वाले, और चौकीदार की व्यवस्था करनी होगी. मेनका ने कहा कि कुत्तों के रख-रखाव और उनकी देखभाल पर करीब 10,000 करोड़ रुपये खर्च आएगा, क्या दिल्ली के पास इतनी बड़ी रकम इस काम के लिए है.

रिया छाबड़िया को-फाउंडर पावडोप्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सही नहीं है. आज कुत्ते, कल बिल्ली और कबूतरों को भी दिल्ली से बाहर कर देंगे क्या. कुत्ते समस्या नहीं हैं रेबीज समस्या है. जब कोविड-19 जैसी बीमारी से भारत को निजात दिलाने के लिए तमाम प्रयास किए गए तो इस दिशा की ओर सरकार काम क्यों नहीं कर रही है. आज लोगों के टैक्स के पैसों से बने हुए शेल्टर होम खाली पड़े हैं या फिर बंद पड़े हैं क्यों नहीं उन पर काम किया जा रहा है. एनिमल कम्युनिकेटर इरा कुकरेती ने कहा कि आपको एक कमरे में हमेशा के लिए बंद कर दिया जाए तो आप कैसा महसूस करेंगे.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजा जाए. सड़क पर कुत्ते नजर नहीं आने चाहिए. वहीं अगर कोई पशु प्रेमी इस फैसले के बीच में आया तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी. अदालत के फैसले से कुछ लोग खुश हैं तो कुछ को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रहा है. ऐसे ही कुछ लोगों का गुस्सा सुप्रीम कोर्ट के बाहर सुनवाई वाले दिन भी फूट पड़ा था.

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