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अंतिम इच्छा पूरी कर बेटे ने किया देहदान, कपूर परिवार ने पेश की मानवता की अनूठी मिसाल

रोहतक, 22 जून 2026। मरने के बाद भी शरीर किसी के काम आ जाए तो जीवन सफल है। इस विचार को जीने वाले पाड़ा मोहल्ला निवासी स्वर्गीय श्री शिवलाल कपूर ने मृत्यु के बाद भी समाजसेवा की जो लौ जगाई, वह आज पूरे हरियाणा के लिए प्रेरणा बन गई है। उनके सुपुत्र अमित कपूर ने पिता की अंतिम इच्छा को सर्वोपरि रखते हुए धर्मपत्नी श्रीमती शांति देवी और बेटियों सुमन, किरण, सोनिया व मोनिका की सहमति से उनका देहदान पीजीआईएमएस रोहतक को कर दिया।
स्व. शिवलाल कपूर जीवनभर जीते जी रक्तदान – जाते-जाते अंगदान,मरणोपरांत नेत्रदान एवं देहदान’ के संकल्प पर अडिग रहे। पटवार खाना, गोहाना रोड स्थित शिवालय मंदिर के समीप निवास करने वाले शिवलाल जी ने परिवार को भी यही संस्कार दिए थे। उनके निधन के बाद बेटे अमित ने गम को ताकत में बदला और भारत विकास परिषद से संपर्क कर देहदान की प्रक्रिया पूरी की। इस पुण्य कार्य में परिषद के संयोजक अशोक कुमार गुप्ता, शाखा अध्यक्ष विक्रांत शर्मा, सेवा संयोजक संजय भाटिया एवं रजिंदर कत्याल जी का विशेष सहयोग रहा। परिषद के सदस्यों ने न सिर्फ कागजी कार्यवाही में मदद की, बल्कि पूरे परिवार का हौसला भी बढ़ाया।
सोमवार को स्व. शिवलाल जी का पार्थिव शरीर सम्मान के साथ पीजीआईएमएस रोहतक के एनाटॉमी विभाग को सौंपा गया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल स्वयं उपस्थित रहे। उन्होंने कपूर परिवार से मिलकर आभार जताया और सांत्वना दी।
डॉ. सिंघल ने कहा कि देहदान वीरों का काम है। स्व. शिवलाल जी ने मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का मार्ग चुना। उनका यह बलिदान मेडिकल के सैकड़ों छात्रों को डॉक्टर बनाएगा और आने वाली पीढ़ियों का इलाज संभव करेगा। एनाटॉमी की पढ़ाई बिना कैडावर के अधूरी है। एक देह से कम से कम 15-20 छात्र शरीर रचना विज्ञान सीखते हैं। पीजीआईएमएस परिवार स्व. शिवलाल जी को नमन करता है और कपूर परिवार के साहस को सलाम करता है।
डॉ सिंघल ने आमजन से भावुक अपील करते हुए कहा कि रक्तदान से आप एक जान बचाते हैं, पर देहदान से आप सैकड़ों डॉक्टर तैयार कर हजारों जानें बचाने का रास्ता बनाते हैं। मैं हर सक्षम व्यक्ति से अनुरोध करता हूं कि सोटो हरियाणा के साथ मिलकर अंगदान का संकल्प लें। यही सच्ची मानव सेवा है।
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बेटी बोलीं- पापा अब कई डॉक्टर बनाकर हजारों को जीवन देंगे
बेटी सुमन ने नम आंखों से बताया कि पापा हमेशा कहते थे कि शरीर मिट्टी है, इसे जलाने से बेहतर है कि किसी के काम आ जाए। आज हमें गर्व है कि पापा से मेडिकल के छात्र पढ़ कर हजारों लोगों की जान बचाएंगे। वो शरीर से नहीं, अपने कर्मों से हमेशा अमर रहेंगे।
देहदान के समय एनाटॉमी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विवेक मलिक, डॉ. गोपाल गुप्ता एवं डॉ. संजय गुप्ता सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। डॉ संजय गुप्ता ने कहा कि डॉ सिंघल ने परिवा को एक पौधा भेंट किया। विभाग ने परिवार को आश्वस्त किया कि पार्थिव देह का उपयोग पूरी गरिमा और सिर्फ शैक्षणिक व शोध उद्देश्य के लिए ही किया जाएगा।
भारत विकास परिषद के संयोजक अशोक गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेज तो बढ़ रहे हैं, पर देहदान के अभाव में छात्रों को पढ़ाई में दिक्कत आती है। एक कैडावर से पूरा बैच सीखता है। स्व. शिवलाल जी जैसे लोग ही चिकित्सा शिक्षा की रीढ़ हैं। उन्होंने लोगों से अंगदान-देहदान के लिए आगे आने का आह्वान किया।
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कैसे करें देहदान का संकल्प?
सोटो की स्टीयरिंग कमेटी के चेयरमैन डॉ एस के सिंघल ने कहा कि अंगदान की शपथ पत्र भरने का इच्छुक व्यक्ति पीजीआईएमएस रोहतक के चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में स्थित कमरा नंबर 17 में आकर अंगदान का फार्म भर सकता है और आमजनता को इसके लिए जागरूक कर सकता है। उन्होंने कहा कि
शिवलाल कपूर का जीवन एक संदेश दे गया शरीर नश्वर है, पर नेक काम से मिली ख्याति अमर होती है।

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