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सदियों के संघर्ष के बाद भी अडिग सोमनाथ: रोहतक में विशेष प्रदर्शनी का आयोजन

रोहतक, 12 मई। भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक चेतना के प्रतीक “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के अंतर्गत लघु सचिवालय स्थित ई-दिशा केंद्र में एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। यह प्रदर्शनी एक सप्ताह तक प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक आमजन के अवलोकनार्थ खुली रहेगी। प्रदर्शनी में सोमनाथ मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जानकारी को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी संजीव सैनी ने बताया कि यह प्रदर्शनी सोमनाथ मंदिर की गौरवशाली परंपरा, संघर्ष, पुनर्निर्माण और भारत की अडिग आस्था को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में प्रभास पाटन स्थित श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की ऐतिहासिक यात्रा को आकर्षक चित्रों, जानकारीपूर्ण विवरणों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से दर्शाया गया है।प्रदर्शनी में यह भी दिखाया गया है कि किस प्रकार सदियों तक अनेक आक्रमणों और विनाश का सामना करने के बावजूद सोमनाथ मंदिर बार-बार पुनर्निर्मित हुआ और भारत की सनातन चेतना एवं सांस्कृतिक निरंतरता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। प्रदर्शनी में मंदिर के संघर्ष और पुनर्जागरण की प्रेरणादायक गाथा को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है।इसके अलावा प्रदर्शनी में त्रिवेणी संगम घाट, पंच पांडव गुफा, प्रभास क्षेत्र की वैदिक विरासत, महाभारत एवं पुराणों से जुड़ी कथाओं सहित सोमनाथ मंदिर के विभिन्न कालखंडों में हुए पुनर्निर्माण और संरक्षण की ऐतिहासिक झलक भी प्रस्तुत की गई है।डीआईपीआरओ संजीव सैनी ने बताया कि प्रदर्शनी में यह संदेश प्रमुखता से दर्शाया गया है कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, राष्ट्र गौरव और पुनर्जागरण का प्रतीक है। बार-बार हुए आक्रमणों के बावजूद आज भी सोमनाथ का अडिग खड़ा रहना भारत की वीर संतानों के साहस, स्वाभिमान और अटूट आस्था का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना, सांस्कृतिक चेतना को जागृत करना तथा राष्ट्र निर्माण में सनातन परंपरा के योगदान को रेखांकित करना है। यह प्रदर्शनी विद्यार्थियों, युवाओं, इतिहास प्रेमियों एवं आम नागरिकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

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