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फौजी की पत्नी ने जाते-जाते भी दिया देश को जीवन: ब्रेन डेड घोषित महिला ने 4 लोगों को दिया नया जीवन


रोहतक, 9 सितंबर। यह कहानी आंसुओं से भीगी है, लेकिन इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल भी है। सेना के एक जवान की 30 साल की पत्नी, दो छोटे-छोटे मासूम बच्चों की मां, राजस्थान की रहने वाली एक महिला को अचानक ब्रेन हेमरेज हो गया। परिवार ने चंडी मंदिर स्थित कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर कैंट में इलाज के लिए भर्ती कराया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने महिला को ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

जिस घर में दो छोटे बच्चों की किलकारी गूंजती थी, वहां मातम पसर गया। पति के कंधों पर एक तरफ देश की रक्षा के साथ दो मासूम बच्चों की जिम्मेदारी थी और दूसरी तरफ पत्नी के बिछड़ने का असहनीय दर्द। लेकिन इसी दर्द और गम के बीच उस जवान पति ने वो साहसिक और महान फैसला लिया, जिसने आज चार लोगों की जिंदगी बचा ली और कई परिवारों को रोने से बचा लिया।

बॉक्स: पति ने भारी मन से अपनी पत्नी के अंगदान के लिए हामी भर दी।
इस महान दान की जानकारी देते हुए पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि यह केवल अंगदान नहीं, बल्कि मानवता का सबसे बड़ा बलिदान है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि फौजी परिवार ने देश की रक्षा करते हुए तो बलिदान दिया ही था, आज एक फौजी की पत्नी ने जाते-जाते भी देश के लोगों को जीवन दान दे दिया। 30 साल की उम्र में दो छोटे बच्चों को छोड़कर जाना बेहद दर्दनाक है, लेकिन उनके पति ने जिस हिम्मत का परिचय दिया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने अपने निजी दुख को भूलकर दूसरों के घरों में उजाला करने का फैसला किया। ऐसी महान आत्मा को हम सब नमन करते हैं। कुलपति डॉ एच के अग्रवाल ने बताया कि महिला के अंगदान से कुल छह लोगों को नया जीवन मिला है।

बॉक्स: कुलपति की पूरे प्रदेश से अपील
कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने पूरे हरियाणा और देशवासियों से अपील की कि इस परिवार के जज्बे को सलाम करें और अंगदान के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमएस रोहतक में अंगदान के लिए हमेशा काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि आज उस मां के दो मासूम बच्चे भले ही मां के बिना बड़े होंगे, लेकिन उन्हें जीवन भर इस बात पर गर्व रहेगा कि उनकी मां मर कर भी पांच लोगों की मां बन गई। वह पांच लोगों के शरीर में हमेशा जिंदा रहेंगी।

मां के जाने से छह घरों में लौटी खुशियां
सोटो हरियाणा की स्टीयरिंग कमेटी के अध्यक्ष और पीजीआईएमएस के निदेशक डॉक्टर एस के सिंघल ने बताया कि जानकारी के अनुसार महिला द्वारा किए गए अंगदान के तहत सोटो, रोटो और नोटो द्वारा सारी रात अंगों को नियमानुसार अलोट किया गया, जिसके तहत –

कुलसचिव डॉक्टर रूप सिंह ने कहा कि पीजीआईएमएस रोहतक में अब अंगदान को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है और ऐसे साहसिक परिवारों की वजह से ही डोनर और रिसीवर के बीच का गैप कम हो रहा है।

आंखें दान कर गईं, ताकि कोई और अपनी मां को देख सके: चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल

पीजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने इस घटना को बेहद मार्मिक बताते हुए कहा कि एक महिला के लिए उसके बच्चे ही उसकी पूरी दुनिया होते हैं।
डॉ. मित्तल ने कहा कि सोचिए, उस पति पर क्या बीती होगी जिसके दो छोटे बच्चे मां के आंचल के लिए रो रहे होंगे। लेकिन उस पिता ने सोचा कि मेरी पत्नी तो चली गई, लेकिन उसकी आंखों से कोई और अपनी मां को देख सकेगा, उसके हद्य,लिवर और किडनी से किसी और के बच्चे अनाथ होने से बच जाएंगे। इससे बड़ा और पवित्र सोच कोई नहीं हो सकता।
डॉ कुंदन मित्तल ने सभी लोगों से अपील की कि अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करें। उन्होंने कहा कि मृत्यु अटल है, लेकिन अंगदान करके हम मर कर भी कई लोगों में जिंदा रह सकते हैं।

राजस्थान से चंडीमंदिर तक और चंडीमंदिर से पूरे देश में फैला उजाला:
सोटो हरियाणा के नोडल अधिकारी डॉक्टर सुखबीर सिंह ने बताया कि यह परिवार मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है। सेना में तैनाती के कारण चंडीमंदिर में रह रहा था। ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर स्थिति के बाद जब चंडीमंदिर हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने ब्रेन डेड की पुष्टि की, तो आर्मी अस्पताल चंडीमंदिर के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर कर्नल डॉ अनुराग की टीम ने परिवार को अंगदान के लिए काउंसलिंग की। शुरुआत में परिवार सदमे में था, लेकिन पति ने खुद को संभाला और कहा कि मेरी पत्नी तो वापस नहीं आएगी, लेकिन उसके अंगों से अगर किसी का सुहाग बचेगा, किसी के बच्चे की मां बच जाएगी, तो मेरी पत्नी की आत्मा को शांति मिलेगी।
बाॅक्स: सारी रात जागे कुलपति डाॅ. अग्रवाल :
जनसपंर्क विभाग के सीनियर प्रो इंचार्ज डाॅ. मंजूनाथ बीसी ने बताया कि रात को ही अंगों का आंवटन शुरू होते ही ग्रीन कॉरिडोर बनाने की तैयारी शुरू की गई। पहली बार इतना बडा ग्रीन कोरिडोर बनने के चलते कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल खुद भी सोटो हरियाणा की टीम के साथ पूरी रात जागते रहे और पल-पल की जानकारी लेते रहे ताकि तथा जरूरी दिशा-निर्देश देते रहे, ताकि रास्ते में एक मिनट की भी देरी न हो और अंगदान में किसी भी प्रकार की समस्या न आए। डाॅ. मंजूनाथ ने बताया कि डाॅ. अग्रवाल अल सुबह भी चिकित्सकों व अन्य स्टाफ का हौंसला बढाने के लिए खुद आए और टीम को अंग लेने के लिए चंडीमंदिर रवाना किया।

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