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SHO नरेंद्र सिंह ने फेकर् फैक्ट्री संचालक को मारे थप्पड़…फैक्ट्री संचालक बोला- “चालान मंजूर था, बेइज्जती नहीं”

जनता को सुरक्षित्र रखने का काम पुलिस का होता है, लेकिन सोचिए जब पुलिस ही लोगो से बदसलूकी करने लगे तो आम जनता किस के पास जाकर अपना दुखड़ा रोएगी, हरियाणा पुलिस का एक और कांड सामने आया है जिसमे पुलिस ने न सिर्फ ग़लत व्यवहार किया बल्कि एक व्यक्ति की सामाजिक तौर पर बेजज्जती भी कराई।

हरियाणा के यमुनानगर में पुलिस का एक ऐसा कांड सामने आया जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए है, शहर थाना प्रभारी SHO नरेंद्र सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वह एक फैक्ट्री संचालक को सरेआम थप्पड़ मारते और धक्का देते नजर आ रहे हैं। घटना रेलवे रोड स्टेशन चौक स्थित एक ढाबे के बाहर की बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, गंगानगर कॉलोनी निवासी संजीव कुमार अपनी फैक्ट्री “जय श्रीश्याम एंटरप्राइजेज” चलाते हैं। गुरुवार रात वह अपने परिचित की बर्थडे पार्टी में शामिल होने ढाबे पर पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी बाइक सड़क किनारे खड़ी थी। तभी गश्त कर रही पुलिस टीम वहां पहुंची और बाइक के मालिक के बारे में पूछताछ शुरू कर दी।

संजीव कुमार का आरोप है कि जैसे ही उन्होंने बाइक अपनी होने की बात कही, SHO नरेंद्र सिंह उन पर भड़क गए। उन्होंने बिना बात सुने पहले धक्का दिया और फिर सरेआम थप्पड़ मारने शुरू कर दिए। संजीव का कहना है कि उनके पास बाइक के सभी वैध दस्तावेज मौजूद थे और यदि बाइक गलत पार्क थी तो वह चालान भरने के लिए भी तैयार थे, लेकिन सार्वजनिक रूप से मारपीट और अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

पीड़ित ने कहा,
“अगर गलती थी तो चालान काटते, लेकिन किसी पुलिस अधिकारी को कानून हाथ में लेकर थप्पड़ मारने का हक नहीं है।”

घटना का CCTV वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि SHO पहले संजीव को धक्का देते हैं, फिर दोबारा पास जाकर थप्पड़ मारते हैं। मौके पर मौजूद लोग बीच-बचाव की कोशिश भी करते नजर आ रहे हैं, लेकिन माहौल काफी देर तक गरमाया रहा।

वहीं, SHO नरेंद्र सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि संजीव ने शराब पी रखी थी और वह पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहा था। SHO के मुताबिक, बाइक की नंबर प्लेट स्पष्ट नहीं थी और मौके पर वैध दस्तावेज भी पेश नहीं किए गए, जिसके चलते वाहन को इंपाउंड किया गया।

फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या कानून व्यवस्था बनाए रखने वालों को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार है?

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