आज साल की सबसे बड़ी पूर्णिमा यानी की शरद पूर्णिमा मनाई जा रही है। शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी और इंद्र की पूजा की जाती है। इसके व्रत को कोजागिरी व्रत भी कहते हैं। इसी दिन महार्षि वाल्मीकि जयंती और महार्षि पराशर ऋषि जयंती भी मनाते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार, आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन की रात चंद्रमा पूरे 16 कलाओं से पूर्ण होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा से जो किरणें निकलती हैं वह अमृत की समान होती हैं। शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की विशेष तौर पर पूजा की जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी रात में भ्रमण पर भी निकलती हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कि इस बार शरद पूर्णिमा पर क्या विशेष संयोग बन रहा है…

आज के दिन बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मीनारायण योग, सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग, चंद्र और गुरु की युति से गजकेसरी योग बन रहा है। इसके अलावा बुध, शनि और गुरु तीनों के स्वराशि होने से भद्र, शश और हंस नाम के पंचमहापुरुष योग भी बन रहे हैं। इन सारे योग के चलते खरीदारी के लिए आज का दिन बहुत ही शुभ माना जा रहा है। 

इस दिन सुबह उठकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि आप किसी पवित्र नदी में स्नान नहीं कर सकते तो घर में ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर अपने ईष्टदेव की अराधना करें। पूजा में आप अक्षत, गंध, तांबूल, दीप, फूल, सुपारी दक्षिणा भगवान को अर्पित करें। रात को आप गाय के दूध से खीर बनाएं और भगवान को भोग लगाएं। रात को खीर से भरा बर्तन चांद की रोशनी में रखें और अगले दिन उसका सेवन करें। आप चांद के नीचे रखी हुई खीर को प्रसाद के रुप में भी जरुर बांटे। 

शरद पूर्णिमा के दिन आप सात्विक आहार का सेवन करें। यदि आप व्रत रख रहे हैं तो फल और जल का सेवन कर सकते हैं। सात्विक भोजर भी आप इस दिन ग्रहण कर सकते हैं। आज के दिन काले रंग के कपड़े न पहनें। सफेद वस्त्र पहनना आज के दिन शुभ माना जाता है। व्रत पूर्ण करने के लिए कथा भी जरुर सुनें। 

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