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रोहतक में 3 साल से आ रहा सीवर जैसा गन्दा पानी: हो रही एलर्जी; CM विंडो और कई जगह कर चुके शिकायत, नहीं हुआ समाधान

रोहतक की बाबा लक्ष्मण पुरी कॉलोनी वासी पिछले काफी समय से गंदे पानी की सप्लाई के कारण परेशान है। लोगों का कहना है कि उन्हें इस पानी से बीमारी भी हो रही है। बड़े हो या बच्चे सभी बीमार पड़ रहे हैं। पिछले करीब दो से तीन साल से इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारियों को शिकायत देने के बाद भी कोई समाधान नहीं हो पाया। इसलिए क्षेत्रवासियों ने मांग की कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। फिलहाल वे काफी दूर से पानी खरीदकर लाने को मजबूर हैं। इसलिए उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

क्षेत्रवासी लाजो देवी ने कहा कि कहा कि उनके यहां बहुत गंदा पानी आ रहा है। पानी खराब आने के कारण एलर्जी हो रही है। चाहे बच्चे हो या बड़े सभी को एलर्जी की दिक्कत है। उन्होंने कहा कि काफी दूर से पीने का पानी लेकर आना पड़ता है। जिसके कारण परेशानी झेल रहे हैं। ऊपर से बीमारी भी चपेट में ले रहे हैं।

सोनिया ने कहा कि यहां दो-तीन दिन में सप्लाई का पानी आता है। यह पानी पीने लायक नहीं है। सीवर के गंदे पानी जैसा सप्लाई होकर आता है। इस पानी को कपड़े धोने में भी इस्तेमाल नहीं कर सकते। एमसी को भी इसकी शिकायत दी थी, लेकिन उन्होंने भी कोई समाधान नहीं किया।

आकाशदीप ने बताया कि उन्होंने पानी का वैध कनेक्शन लिया हुआ है। पब्लिक हेल्थ की शिकायत की साइट पर भी कई बार अपनी समस्याएं व दिक्कत दर्ज करवाई है। उसके बावजूद भी पब्लिक हेल्थ ने कोई संज्ञान नहीं लिया तो एक लिखित शिकायत सब डिवीजन इंजीनियर को दी। वहीं अधिकारियों ने शिकायत को कूड़े की पेट्‌टी में डाल दिया।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि इसकी शिकायत एसई व एक्सईएन को भी दी गई लेकिन अधिकारियों ने शिकायत के बाद भी समस्या का हल नहीं किया। उन्होंने सीएम विंडो में भी शिकायत दी थी। लेकिन अधिकारी नागरिकों की सहमति के बिना ही उस शिकायत को बंद कर देते हैं। यहां तक कि गृह मंत्री को भी शिकायत दे चुके हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले करीब डेढ़ साल से शिकायतों का सिलसिला जारी है। क्योंकि पानी काफी गंदा आ रहा है। पीने के पानी की समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है। डेढ़ साल से क्षेत्रवासी गंदे पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। यहां ऐसा पानी आता है जिसे पीना तो दूर अन्य कामों में भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

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